वॉशिंगटन/कैनबरा – ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानेसे की विदेश नीति को लेकर अमेरिकी राजनीतिक हलकों में बेचैनी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी सरकार अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में “समस्या को लेकर कम मुखर” है, जिससे रणनीतिक साझेदारी में अस्पष्टता का संदेश जा रहा है।
पेंटागन ने अल्बानेसे सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि ऑस्ट्रेलिया को AUKUS रक्षा समझौते को पूरी तरह लागू करना है, तो रक्षा बजट को मौजूदा 2.04% से बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कम से कम 3.5% करना होगा। अमेरिका का कहना है कि इस स्तर का निवेश ही नौसेना और रक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके जॉन बोल्टन ने अल्बानेसे को सुझाव दिया है कि वे किसी उच्चस्तरीय मुलाकात या संयुक्त बयानबाज़ी से पहले AUKUS से जुड़ी पेंटागन समीक्षा को स्पष्ट और स्थिर होने दें। बोल्टन का कहना है कि जल्दबाज़ी में उठाए गए कदम रणनीतिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हमले पर ऑस्ट्रेलिया की प्रतिक्रिया 24 घंटे की देरी से आई, जिसे अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई विश्लेषकों ने “फ्लैट-फुटेड” यानी अनुत्तरदायी करार दिया। इस घटना के साथ G7 सम्मेलन के दौरान ट्रम्प से आमने-सामने बातचीत न होना भी आलोचना का कारण बना है।
विदेश नीति पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि अल्बानेसे सरकार की “कम मुखर” रणनीति से ऑस्ट्रेलिया की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और अमेरिका के साथ उसकी रणनीतिक विश्वसनीयता दोनों कमजोर हो सकती हैं। उनका मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल में स्पष्ट और त्वरित कूटनीतिक संदेश ही देश की ताकत को बनाए रख सकते हैं।