यहूदी विरोध पर ढिलाई: विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक संस्थानों की फंडिंग खतरे में

यहूदी विरोध पर ढिलाई: विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक संस्थानों की फंडिंग खतरे में

कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया में यहूदी विरोध (Antisemitism) को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। देश के यहूदी विरोध मामलों के विशेष दूत (Antisemitism Envoy) ने सिफारिश की है कि उन विश्वविद्यालयों, चैरिटी संस्थाओं और सांस्कृतिक निकायों की फंडिंग रोक दी जाए जो यहूदी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने या उसे नजरअंदाज करने में लिप्त हैं या इस पर उचित कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

विशेष दूत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी सार्वजनिक या निजी संस्थान को टैक्सपेयर्स की फंडिंग तभी दी जानी चाहिए जब वह नस्लीय और धार्मिक भेदभाव के खिलाफ सख्त कदम उठाए। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के महीनों में ऑस्ट्रेलिया में यहूदी विरोधी घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है, खासकर विश्वविद्यालय परिसरों और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान।

सरकार से अपील की गई है कि वह उन संस्थानों के लिए सख्त गाइडलाइन्स लागू करे, जो शिक्षा, संस्कृति या जनसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अगर कोई संस्था यहूदी विरोध के मामलों को गंभीरता से नहीं लेती, तो उसके लिए सरकारी सहायता बंद कर देना चाहिए।

यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण दुनिया भर में यहूदी और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव बढ़ा है। ऑस्ट्रेलिया भी इससे अछूता नहीं रहा है।

प्रभाव:
इस सिफारिश के बाद अब कई विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक संस्थानों और एनजीओ के संचालन पर असर पड़ सकता है। शिक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय इस मसले पर विचार कर रहे हैं और संभावित तौर पर फंडिंग से जुड़ी नई शर्तें तय की जा सकती हैं।

यह क्यों ज़रूरी है:
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने हाल के वर्षों में धार्मिक सहिष्णुता और बहुसांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने पर ज़ोर दिया है। इस सिफारिश को उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।