गुप्ता कोल माइंस पर संकट गहराया, तहमूर खदान की नीलामी की नौबत

गुप्ता कोल माइंस पर संकट गहराया, तहमूर खदान की नीलामी की नौबत

ऑस्ट्रेलिया में कारोबारी चुनौतियों का सामना कर रहे उद्योगपति संजीव गुप्ता के खनन साम्राज्य पर एक और बड़ा झटका लगने वाला है। न्यू साउथ वेल्स स्थित उनकी तहमूर (Tahmoor) कोयला खदान के खिलाफ लेनदारों ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। आरोप है कि खदान से जुड़ा बकाया ऋण लंबे समय से अटका हुआ है और अब भुगतान की कोई ठोस संभावना नज़र नहीं आ रही।

यूनियन-समर्थित बीमा कंपनी ने की कानूनी कार्रवाई

मामले की शुरुआत तब हुई जब एक प्रमुख यूनियन-समर्थित बीमा कंपनी ने बकाया राशि की वसूली के लिए कानूनी कार्यवाही दायर की। यह कंपनी खदान में काम करने वाले श्रमिकों और सप्लायर्स के भुगतान की गारंटी देने वाली बीमा पॉलिसी से जुड़ी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने बार-बार भुगतान की मांग की लेकिन कोई ठोस जवाब न मिलने पर अदालत का सहारा लिया।

गुप्ता समूह के लिए आखिरी सहारा

तहमूर खदान गुप्ता समूह की ऑस्ट्रेलिया में बची हुई आखिरी प्रमुख कोयला संपत्ति है। इससे पहले, वित्तीय संकट और बढ़ते कर्ज़ के चलते समूह को कई परिसंपत्तियाँ बेचनी पड़ीं। अगर यह खदान भी हाथ से निकलती है, तो ऑस्ट्रेलिया में गुप्ता समूह का खनन कारोबार लगभग समाप्त हो जाएगा।

कर्ज़ संकट की जड़

विश्लेषकों का मानना है कि गुप्ता समूह पर वैश्विक स्तर पर भारी कर्ज़ का बोझ है। यूरोप, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में फैले उनके इस्पात और खनन कारोबार को कोविड महामारी और बाज़ार में आई मंदी से झटका लगा। तहमूर खदान से होने वाली आय कर्ज़ चुकाने में अहम भूमिका निभा सकती थी, लेकिन उत्पादन और बिक्री में कमी से नकदी संकट और गहरा गया।

श्रमिकों पर मंडराया संकट

तहमूर खदान में सैकड़ों स्थानीय श्रमिक और ठेकेदार जुड़े हुए हैं। यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि परिसमापन की स्थिति में न केवल नौकरियाँ ख़तरे में पड़ जाएँगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।