सिडनी – ऑस्ट्रेलिया में अपनी मेहनत की कमाई से घर खरीदने का सपना अब पहले से कहीं ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि मौजूदा पीढ़ी – विशेष रूप से मिलेनियल्स और जनरेशन Z – के लिए घर खरीदना अब तक का सबसे कठिन कार्य बन चुका है।
वहीं, पहले की पीढ़ियाँ जैसे कि बेबी बूमर्स और जनरेशन X, जब इसी उम्र में थीं, तो उन्हें घर खरीदने में इतने आर्थिक और सामाजिक संघर्षों का सामना नहीं करना पड़ा था।
रियल एस्टेट वेबसाइटों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में औसतन घर की कीमतें 13 गुना अधिक हो गई हैं एक आम आय वाले व्यक्ति की सालाना कमाई के मुकाबले। जबकि 1990 के दशक में यह अनुपात केवल 4 से 5 गुना के आसपास था।
सिडनी में एक औसत घर की कीमत अब $1.3 से $1.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक पहुँच चुकी है। इसके विपरीत, देश में औसतन वार्षिक वेतन अभी भी लगभग $100,000 के आसपास ही है।
एक रिपोर्ट के अनुसार:
1991 में, 25–39 वर्ष की उम्र के 66% ऑस्ट्रेलियाई घर के मालिक थे।
2021 में, यही प्रतिशत घटकर सिर्फ 55% रह गया है।
इसका सीधा संकेत है कि हर नई पीढ़ी के लिए "अपना घर" पाना पहले से ज्यादा कठिन होता जा रहा है।
अब बड़ी संख्या में युवा अपने घर खरीदने के लिए माता-पिता की मदद ले रहे हैं। इसे ‘मम एंड डैड बैंक’ कहा जा रहा है, जहाँ बच्चों को डाउन पेमेंट के लिए पारिवारिक आर्थिक सहायता की ज़रूरत पड़ रही है। लेकिन सभी को यह सुविधा मिल पाना संभव नहीं, जिससे आर्थिक असमानता और बढ़ती जा रही है।
होम लोन की बढ़ती ब्याज दरों और ऊँची संपत्ति कीमतों के कारण, युवा अब लंबे समय तक किराए पर रहने को मजबूर हैं। कई बार तो घर खरीदने के लिए 6–8 साल की बचत की ज़रूरत होती है, जो कि एक मध्यम वर्गीय नौकरी पेशा व्यक्ति के लिए काफी मुश्किल है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को नेगेटिव गियरिंग जैसे कर लाभों में सुधार करना चाहिए, ताकि घरों को निवेश की बजाय आवास के रूप में देखा जाए। इसके साथ ही, किफायती आवास योजनाओं का विस्तार और पहले घर खरीदने वालों के लिए टैक्स राहत जरूरी है।