जब पूरी दुनिया की नज़रें इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण संघर्ष पर टिकी हैं, उस वक्त ग़ाज़ा में मानवीय त्रासदी और भी गहरा रही है। इजरायली हमलों से तबाह हुए ग़ाज़ा में अब बमों की जगह भूख और बीमारियाँ लोगों की जान ले रही हैं।
ग़ाज़ा की सड़कों पर खामोशी और मलबा पसरा है, अस्पताल टूट चुके हैं, दवाइयां खत्म हो चुकी हैं और खाद्य आपूर्ति की सभी कड़ियाँ टूट गई हैं। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है – कुछ बमों से और कई भूख और कुपोषण से।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम हर दिन मर रहे हैं। पहले बमों से डरते थे, अब रोटी की तलाश में जान चली जाती है। जिनके घर बचे हैं, उनके पास खाने को कुछ नहीं।”
बिजली और पानी की आपूर्ति भी लगभग पूरी तरह ठप है। बच्चों को दूध नहीं मिल रहा, बुजुर्ग इलाज के बिना तड़प रहे हैं, और कई इलाकों में तो महीनों से कोई राहत सामग्री नहीं पहुंची।
इधर, इजरायल का कहना है कि वह आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर रहा है, लेकिन ग़ाज़ा में मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वह तत्काल मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए हस्तक्षेप करे और ग़ाज़ा में राहत गलियारे खोले जाएं।
जब युद्ध का शोर दुनिया को बहरा कर रहा हो, तब ग़ाज़ा की खामोश चीखें किसी को सुनाई नहीं दे रही हैं। वहां हर दिन, हर घंटे, भूख और बम दोनों से इंसानियत दम तोड़ रही है।