कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया में असफल शरणार्थी आवेदकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, और यह मुद्दा प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का कहना है कि अगर इस पर तुरंत काबू नहीं पाया गया, तो यह स्थिति सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा—तीनों मोर्चों पर “टिक-टिक करता टाइम बम” साबित हो सकती है।
आव्रजन विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, हजारों आवेदक जिनके शरण के दावे खारिज हो चुके हैं, अभी भी देश में मौजूद हैं। इनमें से कई लोग वर्षों से कानूनी अपील या प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझे हुए हैं, जबकि कुछ भूमिगत हो गए हैं, जिससे निगरानी और प्रवर्तन एजेंसियों पर भारी दबाव है।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार इस संवेदनशील मामले में पर्याप्त कठोर कदम नहीं उठा रही है। लिबरल पार्टी के नेताओं का कहना है कि कमजोर नीतियों के चलते न केवल सीमा सुरक्षा कमजोर हुई है, बल्कि यह संदेश भी जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया में अवैध रूप से ठहरना आसान है।
दूसरी ओर, मानवीय संगठनों का कहना है कि सरकार को केवल कठोरता पर ध्यान देने के बजाय इन लोगों की कानूनी स्थिति का मानवीय और स्थायी समाधान निकालना चाहिए। उनका तर्क है कि लंबे समय तक अनिश्चितता में रखना किसी भी व्यक्ति के मानवाधिकारों के खिलाफ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन सकता है और 2028 के संघीय चुनाव में मतदाताओं के रुख को भी प्रभावित कर सकता है।