ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों में बढ़ता हिंसा और अनुशासन संकट

शिक्षकों और छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों में बढ़ता हिंसा और अनुशासन संकट

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा तंत्र में एक “शांत लेकिन तेजी से बढ़ता” संकट सामने आ रहा है। हालिया रिपोर्टें बताती हैं कि देश के कई स्कूल और प्रारंभिक शिक्षा केंद्र अब सुरक्षित वातावरण देने में नाकाम हो रहे हैं।

ओईसीडी (OECD) के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई छात्रों को औसत से कहीं अधिक बार बुलिंग का सामना करना पड़ता है। हर चौथा 15 वर्षीय छात्र महीने में कई बार बुलिंग का शिकार होता है, जबकि एक तिहाई छात्रों का कहना है कि कक्षा में शिक्षक की बात तक नहीं सुनी जाती। अनुशासन के मामले में ऑस्ट्रेलिया, विकसित देशों की सूची में सबसे निचले स्थानों में आता है।

शिक्षकों पर बढ़ रहे हमले
सेफ वर्क ऑस्ट्रेलिया के मुताबिक, 2017–18 से 2021–22 के बीच शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों पर हिंसा और हमले के गंभीर मामलों में 56% की बढ़ोतरी हुई। विक्टोरिया राज्य में तो छात्रों के हिंसक व्यवहार से जुड़े मामले पिछले 10 साल में पांच गुना बढ़ चुके हैं। एक राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार, लगभग आधे प्रिंसिपलों पर पिछले वर्ष शारीरिक हमला हुआ।

माता-पिता भी खींच रहे बच्चे स्कूलों से बाहर
सुरक्षा की चिंता के चलते कई माता-पिता बच्चों को स्कूल से निकालकर होमस्कूलिंग का विकल्प चुन रहे हैं।

मुख्य कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ “क्लासरूम मैनेजमेंट” का मामला नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव का परिणाम है। सोशल मीडिया ने बुलिंग और अपमानजनक व्यवहार को और बढ़ावा दिया है। शिक्षक और प्रिंसिपल अब अनुशासन लागू करने पर भी माता-पिता के गुस्से का सामना कर रहे हैं।

समाधान की ज़रूरत
शिक्षाविदों का सुझाव है कि गंभीर व्यवहारिक समस्याओं वाले छात्रों के लिए विशेष सहायता केंद्र, मोबाइल इंटरवेंशन टीमें और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। “सही संसाधन और समर्थन के बिना ‘समावेश’ (inclusion) की नीति, न पीड़ितों को बचाती है, न ही दोषियों को सुधारती है,” विशेषज्ञ कहते हैं।

सरकार और शिक्षा विभागों से मांग है कि समस्या को खुले तौर पर स्वीकार किया जाए और सिर्फ बयानबाज़ी या शिक्षक प्रशिक्षण के भरोसे न रहा जाए।