भारत और अमेरिका के बीच हाल के वर्षों में टैरिफ (शुल्क) को लेकर चले विवाद पर अब समाधान की उम्मीदें मजबूत हो गई हैं। अमेरिका में भारत के लिए राजदूत-नामित सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच मतभेद उतने गहरे नहीं हैं जितना अक्सर माना जाता है। गोर का मानना है कि आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा सुलझ जाएगा और इससे द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊर्जा मिलेगी।
बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सोशल मीडिया पर सौहार्दपूर्ण बातचीत देखने को मिली। इसके बाद ही यह अटकलें तेज हुईं कि अमेरिका और भारत टैरिफ विवाद पर किसी साझा समाधान की ओर बढ़ सकते हैं।
ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उनकी प्रशासनिक टीम भारत के साथ व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए ठोस वार्ता बिंदु तैयार कर रही है। अब गोर की टिप्पणी ने इसे और मजबूती दी है।
क्वाड देशों — भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया — का शिखर सम्मेलन नवंबर में भारत में प्रस्तावित है। अभी तक इस बात पर संशय बना हुआ था कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप इसमें शामिल होंगे, क्योंकि टैरिफ विवाद के चलते माहौल तनावपूर्ण माना जा रहा था।
गोर ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप क्वाड साझेदारी को मज़बूत करने के इच्छुक हैं और भारत आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि तारीख को लेकर उन्होंने कोई ठोस जानकारी नहीं दी।
38 वर्षीय सर्जियो गोर को हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत का राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों का प्रमुख राजनयिक नियुक्त किया है। गोर ने अपने कन्फर्मेशन सुनवाई के दौरान कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापारिक बाधाएँ अस्थायी हैं और इन्हें बातचीत से निपटाया जा सकता है।
अगर सीनेट से उनकी नियुक्ति पर मुहर लगती है तो गोर भारत में अब तक के सबसे युवा अमेरिकी राजदूत होंगे।
सीनेट में विदेश मामलों की समिति में गोर का परिचय कराते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी भारत-अमेरिका रिश्तों को “दुनिया के सबसे ऊँचे स्तर” का बताया।
रूबियो ने कहा कि 21वीं सदी की कहानी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से लिखी जाएगी और भारत इसमें केंद्रीय भूमिका निभाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका ने अपनी लड़ाकू कमान का नाम बदलकर “हिंद-प्रशांत कमान” रखा है, जो भारत की रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।
हाल के महीनों में अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ आयातों पर शुल्क दोगुना कर दिया था, विशेषकर रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को देखते हुए।
कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे।
भारत ने भी जवाबी कदम उठाए थे, जिससे व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ गया था।
अब संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे उद्योग और निवेशकों को राहत मिल सकती है।
व्यापार को राहत — यदि टैरिफ विवाद सुलझा, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में आसानी होगी और अमेरिकी कंपनियों को भी भारत में निवेश को लेकर स्थिरता का भरोसा मिलेगा।
रणनीतिक सहयोग मज़बूत — क्वाड शिखर सम्मेलन में ट्रंप की भागीदारी से भारत-अमेरिका के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
राजनीतिक संदेश — यह यात्रा और समझौता चीन को अप्रत्यक्ष संदेश भी होगा कि हिंद-प्रशांत में लोकतांत्रिक देशों की साझेदारी और सुदृढ़ हो रही है।