नई दिल्ली, 10 जुलाई 2025 – वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने आपातकाल (Emergency) की 50वीं वर्षगांठ पर एक लेख लिखते हुए 1975 की इंदिरा गांधी सरकार के उस फैसले की आलोचना की है, जिसमें देश में लोकतांत्रिक अधिकारों को स्थगित कर दिया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज का भारत, उस दौर के भारत से काफी अलग है।
थरूर ने अपने लेख में कहा कि आपातकाल लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध था और यह कांग्रेस पार्टी के इतिहास का एक 'काला अध्याय' है। उन्होंने लिखा, "1975 में जो हुआ, वह गलत था और उसकी आलोचना होनी चाहिए। लेकिन हमें यह समझना होगा कि आज का भारत 1975 का भारत नहीं है। आज की परिस्थितियां, संवैधानिक ढांचा और जनता की जागरूकता काफी अधिक विकसित है।"
उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जब विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी, प्रेस की आजादी पर रोक और नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, थरूर ने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस ने इस गलती को स्वीकार किया है और आगे की पीढ़ियों ने इससे सबक सीखा है।
शशि थरूर ने परोक्ष रूप से मौजूदा केंद्र सरकार पर भी तंज कसा, जहां उन्होंने लिखा कि आज के भारत में भी अगर असहमति को दबाया जाए, मीडिया को नियंत्रित करने का प्रयास हो, या लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर किया जाए, तो वह भी चिंता का विषय है। उन्होंने आगाह किया कि किसी भी राजनीतिक दल को लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों से नहीं भटकना चाहिए।
लेख के प्रमुख बिंदु:
1975 की इमरजेंसी एक ऐतिहासिक भूल थी
आज का भारत अधिक जागरूक और लोकतांत्रिक है
कांग्रेस ने अतीत से सबक लिया है
लोकतंत्र की रक्षा सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है
थरूर का यह लेख राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ आलोचकों ने इसे कांग्रेस की आत्मस्वीकृति कहा, तो वहीं कुछ ने इसे वर्तमान शासन पर अप्रत्यक्ष हमला बताया है।