ब्रिटेन का सख़्त कदम: दोषी भारतीय समेत 15 देशों के नागरिकों को अपील से पहले ही किया जाएगा निर्वासित

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता, सरकार बोली—न्याय और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं

ब्रिटेन का सख़्त कदम: दोषी भारतीय समेत 15 देशों के नागरिकों को अपील से पहले ही किया जाएगा निर्वासित

ब्रिटेन की सरकार ने अपने “पहले निर्वासन, बाद में अपील” (Deport Now, Appeal Later) कार्यक्रम का दायरा काफी बढ़ा दिया है। अब भारत समेत 15 और देशों के नागरिक, अगर गंभीर अपराध में दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें अपनी मानवाधिकार अपील की सुनवाई पूरी होने से पहले ही देश से बाहर भेजा जाएगा।

गृह सचिव ने घोषणा करते हुए कहा—

“हम अपने देश को अपराधियों से सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विदेशी अपराधियों के मामलों में लंबी कानूनी देरी और जेल में उनकी मौजूदगी, ब्रिटिश करदाताओं पर अनावश्यक बोझ डालती है। इस नई व्यवस्था से प्रक्रिया तेज़ होगी।”

क्यों लाया गया यह बदलाव

  • पहले यह नीति केवल चुनिंदा देशों के लिए लागू थी, लेकिन अब इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नाइजीरिया, घाना और कई अन्य देशों को जोड़ा गया है।

  • सरकार का तर्क है कि कई अपराधी अपील के बहाने लंबे समय तक ब्रिटेन में रहते हैं, जिससे न्यायिक व्यवस्था पर बोझ बढ़ता है।

  • नई सूची में शामिल देशों को “सुरक्षित” माना गया है, यानी वहाँ वापस भेजे गए व्यक्ति को गंभीर खतरा या उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा—सरकार के अनुसार।

मानवाधिकार संगठनों की आपत्ति

कई मानवाधिकार संगठनों और वकीलों का कहना है कि यह कदम कई निर्दोष या कमजोर स्थिति वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

  • आशंका है कि कुछ मामलों में निर्वासन के बाद व्यक्ति अपने देश में प्रताड़ना, राजनीतिक उत्पीड़न या हिंसा का शिकार हो सकता है।

  • वे यह भी कहते हैं कि अपील का अधिकार केवल काग़ज़ पर रह जाएगा, क्योंकि व्यक्ति सुनवाई के दौरान देश में मौजूद नहीं होगा।

सरकार का जवाब

गृह कार्यालय का दावा है कि:

  • हर मामले की व्यक्तिगत रूप से जाँच होगी।

  • निर्वासन केवल उन्हीं मामलों में होगा, जहाँ व्यक्ति की सुरक्षा को कोई गंभीर खतरा न हो।

  • यह नीति ब्रिटेन की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की गति और करदाताओं के हित में है।

संभावित असर

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस नीति के विस्तार से आने वाले महीनों में सैकड़ों विदेशी अपराधियों को देश से बाहर भेजा जा सकता है।
भारत के नागरिकों पर इसका असर खासा हो सकता है, क्योंकि ब्रिटेन में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है, हालांकि यह नीति केवल अपराध सिद्ध हो चुके लोगों पर लागू होगी।