यूसीसी आम सहमति से बने, समाज में मतभेद न हों: मोहन भागवत

यूसीसी आम सहमति से बने, समाज में मतभेद न हों: मोहन भागवत

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इसका निर्माण सभी को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए और इससे समाज में मतभेद उत्पन्न नहीं होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कानून का उद्देश्य सामाजिक समरसता होना चाहिए, न कि विभाजन।

मोहन भागवत ने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया, जहां लगभग तीन लाख सुझाव प्राप्त हुए। सभी हितधारकों से संवाद के बाद ही कानून पारित किया गया, जो एक सकारात्मक उदाहरण है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में न तो कोई बहुसंख्यक है और न ही अल्पसंख्यक, बल्कि हम सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं। संघ प्रमुख ने मुस्लिम और ईसाई समुदाय के साथ विश्वास, मित्रता और सतत संवाद बनाए रखने की आवश्यकता बताई।

धर्म के विषय पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी धर्म में यदि आध्यात्मिकता का अभाव हो जाता है, तो वह प्रभुत्ववादी और आक्रामक स्वरूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि आज इस्लाम और ईसाई धर्म में जो कुछ देखा जा रहा है, वह पैगंबर मोहम्मद और ईसा मसीह की मूल शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है। वास्तविक शांति तभी संभव है, जब धर्म को उसके आध्यात्मिक मूल स्वरूप में समझा जाए।

बीजेपी और आरएसएस के संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि संघ के लिए ‘अच्छे दिन’ भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने की वजह से नहीं आए। उन्होंने कहा कि संघ वर्षों से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहा और जिन्होंने इस विचार का समर्थन किया, उन्हें इसका राजनीतिक लाभ मिला।

संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि आरएसएस को मिली सफलता स्वयंसेवकों की निरंतर मेहनत और वैचारिक प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ समय-समय पर राष्ट्रहित में सुझाव देता है, लेकिन उसका उद्देश्य सत्ता नहीं, समाज निर्माण है।

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है।