‘ब्लड मनी’ की खबरें गलत, मेहदी परिवार चाहता है इंसाफ, नहीं पैसों की डील: सैमुअल जेरोम

‘ब्लड मनी’ की खबरें गलत, मेहदी परिवार चाहता है इंसाफ, नहीं पैसों की डील: सैमुअल जेरोम

नई दिल्ली: यमन में नर्स निमिषा प्रिया की फांसी टालने की खबर ने एक बार राहत दी है, लेकिन उनके बचाव के प्रयासों को अब नया झटका लगा है। मीडिया में ‘ब्लड मनी’ यानी क्षमादान के बदले परिवार को दी जाने वाली नकदी की खबरें सामने आने लगी हैं, जिन्हें निमिषा के बचावकर्ता और यमनी सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम ने पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत बताया है।

केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया, जो यमन में नर्स के रूप में काम कर रही थीं, को तलाल अब्दो मेहदी नामक अपने बिजनेस पार्टनर की मौत का दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई गई है। निमिषा ने मेहदी पर प्रताड़ना और उत्पीड़न का आरोप लगाया था। फांसी की तारीख 16 जुलाई थी, लेकिन इसे फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम ने मीडिया को बताया कि मेहदी के परिवार को लेकर चल रही ‘ब्लड मनी’ की खबरें पूरी तरह से झूठ हैं। मेहदी के भाई ने मीडिया में यह जताया कि उनके परिवार को इंसाफ चाहिए, पैसे नहीं। जेरोम ने कहा, “ब्लड मनी शब्द ही गलत है। हम केवल उनके परिवार के साथ मानवीय रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और वे केवल दया की भीख मांग रहे हैं।”

जेरोम ने यह भी कहा कि भारत में गलत रिपोर्टिंग के कारण मेहदी के परिवार का गुस्सा बढ़ा है, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने मेहदी के परिवार से कई बार मुलाकात की है और विश्वास बनाया है, लेकिन अब फिर से रिश्ते सुधारने होंगे। जेरोम का कहना है कि प्रिया के पास ज्यादा समय नहीं बचा है और स्थिति नाजुक बनी हुई है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया था कि केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बक्र अहमद ने मामले में हस्तक्षेप किया है, लेकिन सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि ये खबरें भी गलत हैं और अभी तक मेहदी के परिवार ने किसी माफी या मुआवजे पर सहमति नहीं दी है। फांसी टालने में फिलहाल रियाद स्थित भारतीय दूतावास की भूमिका बताई जा रही है।

निमिषा की स्थिति गंभीर है क्योंकि वह यमन की राजधानी सना में हैं, जो इस समय हूती विद्रोहियों के कब्जे में है, और भारत की कूटनीतिक पहुंच सीमित है। ऐसे में जेरोम जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम बन गई है।

केरल की 38 वर्षीय निमिषा प्रिया 2008 में बेहतर नौकरी की तलाश में यमन गई थीं। कई अस्पतालों में काम करने के बाद उन्होंने अपना क्लिनिक खोला, जिसके लिए उन्होंने स्थानीय व्यवसायी तलाल अब्दो मेहदी को साझेदार बनाया। मेहदी ने उन्हें लगातार परेशान किया और उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया था, जिससे निमिषा देश छोड़ नहीं पा रही थीं। 2017 में भागने की कोशिश के दौरान मेहदी की मौत हो गई, जिसके बाद निमिषा को गिरफ्तार कर मौत की सजा सुनाई गई।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि भारत सरकार ने निमिषा को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं, लेकिन विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।