ऑस्ट्रेलिया के करदाताओं के धन से संचालित सार्वजनिक प्रसारक Australian Broadcasting Corporation (ABC) एक बड़े राजनीतिक और मीडिया विवाद के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि ABC ने बीते लगभग 18 महीनों के दौरान कई अवसरों पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन Hizb ut-Tahrir से जुड़े एक प्रवक्ता को अपने कार्यक्रमों में स्थान दिया, जिससे उसके “चरमपंथी और लोकतंत्र-विरोधी विचारों” को अनजाने में मंच मिला।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब मीडिया निगरानी संस्थाओं, सुरक्षा विशेषज्ञों और कई सांसदों ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए कि क्या एक कर-वित्तपोषित राष्ट्रीय प्रसारक को ऐसे व्यक्तियों को बार-बार आमंत्रित करना चाहिए, जिनकी विचारधारा को कई देश उग्रवादी और समाज के लिए खतरनाक मानते हैं। आलोचकों का कहना है कि ABC की यह लापरवाही केवल संपादकीय चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
विवाद के तूल पकड़ने के बाद ABC प्रबंधन को सफाई देने और त्वरित कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रसारक ने एक बयान में कहा कि संबंधित कार्यक्रमों और साक्षात्कारों की आंतरिक समीक्षा की जा रही है तथा भविष्य में ऐसे संवेदनशील मामलों में संपादकीय दिशानिर्देशों को और कड़ा किया जाएगा। हालांकि आलोचकों का आरोप है कि यह कदम “बहुत देर से” उठाया गया, क्योंकि संबंधित प्रवक्ता को लंबे समय तक बार-बार मंच मिलता रहा।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई नेताओं ने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों से वसूले गए कर के पैसे से ABC चलता है, तो उसकी जवाबदेही और अधिक होनी चाहिए। उनका कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसे संगठनों को वैधता देना खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है।
मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद एक व्यापक बहस को जन्म देता है—जहां एक ओर पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सभी पक्षों को सुनने की परंपरा है, वहीं दूसरी ओर यह जिम्मेदारी भी है कि मंच का इस्तेमाल हिंसा, नफरत या आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन सार्वजनिक प्रसारकों से अपेक्षा की जाती है कि वे अतिरिक्त सावधानी बरतें।
फिलहाल ABC पर दबाव बना हुआ है कि वह केवल आंतरिक समीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि पारदर्शी ढंग से यह स्पष्ट करे कि भविष्य में ऐसे मामलों से कैसे निपटा जाएगा। यह प्रकरण न केवल ऑस्ट्रेलिया में, बल्कि वैश्विक स्तर पर मीडिया की भूमिका और जिम्मेदारियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।