वॉशिंगटन/फ्लोरिडा:
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विवादित प्रवासी नीति एक बार फिर सुर्खियों में है। फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स क्षेत्र में बने एक नए प्रवासी डिटेंशन सेंटर की एरियल तस्वीरें सामने आई हैं, जिसे लोग 'धरती पर नर्क' और 'एलीगेटर अलकाट्राज़' के नाम से पुकार रहे हैं।
ट्रंप ने पिछले सप्ताह इस डिटेंशन कैंप का दौरा करते हुए मजाक में कहा, “सीधे मत दौड़ो”, यह इशारा करते हुए कि आसपास मौजूद मगरमच्छ यहां कैदियों के लिए "फ्री सिक्योरिटी" का काम करेंगे।
इस डिटेंशन सेंटर को बंद पड़े एक पुराने हवाई अड्डे पर बनाया गया है, जहां पहले संघीय आपदा राहत (FEMA) शिविर हुआ करते थे। अब इन्हें कांटेदार तारों से घेरकर, लगभग 70 नेशनल गार्ड सैनिकों की निगरानी में एक डिटेंशन कैंप में तब्दील कर दिया गया है।
कठोर स्थितियां और अमानवीय व्यवहार
कैदियों का कहना है कि यहां की स्थिति अमानवीय है – 24 घंटे तेज रोशनी चालू रहती है, मच्छर बहुत बड़े हैं, और सुरक्षा व्यवस्था में जानवरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक बंदी ने अमेरिकी मीडिया से कहा, “हम इंसान हैं, कुत्ते नहीं।”
महंगे खर्च और बजट विवाद
हालांकि ट्रंप और उनकी गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम इसे "लो-कॉस्ट" और "प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था" बता रहे हैं, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। फ्लोरिडा राज्य को इस अस्थायी कैंप के संचालन में सालाना लगभग 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़ेंगे।
फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस ने स्पष्ट किया है कि इस राशि का बिल सीधे व्हाइट हाउस को भेजा जाएगा। उधर, गृह सुरक्षा विभाग पहले से ही 1 बिलियन डॉलर के बजट घाटे में है।
मानवाधिकार संगठनों की तीखी आलोचना
अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी मानवाधिकार संगठनों ने इस डिटेंशन कैंप को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का घोर उल्लंघन बताया है। कई संगठनों ने इसे बंद करने और प्रवासियों के साथ मानवीय व्यवहार की मांग की है।
निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप की यह नई योजना जहां कुछ समर्थकों को ‘सख्त प्रवासी नीति’ का उदाहरण लग रही है, वहीं इसे आलोचकों द्वारा लोकतंत्र और मानवता के मूल्यों पर हमला बताया जा रहा है। एवरग्लेड्स का यह ‘एलीगेटर अलकाट्राज़’ आने वाले समय में अमेरिकी चुनावी राजनीति और मानवाधिकार बहस का एक प्रमुख मुद्दा बनने जा रहा है।