वॉशिंगटन/दोहा, 1 अक्तूबर 2025 — अमेरिका और इज़रायल के रिश्तों में बड़ा मोड़ उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ़ कहा कि अगर कतर पर फिर से हमला हुआ तो इसे अमेरिका की सुरक्षा पर सीधा खतरा माना जाएगा और वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
व्हाइट हाउस में इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप की मुलाकात के दौरान यह ऐलान किया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर करते हुए कतर की संप्रभुता और सुरक्षा की गारंटी दी। आदेश में कहा गया है कि कतर पर किसी भी तरह का हमला अमेरिकी हितों को चुनौती माना जाएगा और अमेरिका हर स्तर पर जवाब देगा — चाहे वह कूटनीतिक हो, आर्थिक हो या ज़रूरत पड़ने पर सैन्य।
पिछले महीने इज़रायल ने दोहा (कतर) में हमास के ठिकानों को निशाना बनाते हुए एयरस्ट्राइक की थी। इसमें कई लोग हताहत हुए, जिनमें क़तरी सुरक्षा अधिकारी भी शामिल थे।
इस कार्रवाई के बाद कतर और अरब जगत में कड़ी प्रतिक्रिया हुई और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा।
मजबूरन नेतन्याहू ने क़तर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान से फ़ोन पर माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटना दोहराई नहीं जाएगी।
व्हाइट हाउस बैठक में ट्रंप ने खुद यह कॉल अपनी मौजूदगी में करवाकर माफी की पुष्टि कराई।
राष्ट्रपति ट्रंप ने आदेश जारी कर कहा — “कतर की सुरक्षा से समझौता नहीं होगा। किसी भी तरह का हमला अमेरिका की सुरक्षा के खिलाफ हमला माना जाएगा।”
साथ ही रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक को निर्देश दिया गया है कि कतर के साथ मिलकर संयुक्त प्रतिक्रिया योजना तैयार की जाए, ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत कदम उठाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
एक ओर यह क़तर को अमेरिकी सुरक्षा छतरी देता है, वहीं इज़रायल को चेतावनी का साफ़ संदेश।
खाड़ी देशों, ईरान और अन्य अरब देशों के साथ कतर की स्थिति मज़बूत हो सकती है।
अगर इज़रायल ने दोबारा हमला किया तो अमेरिका किस हद तक अपनी सैन्य गारंटी लागू करता है, यह देखना अहम होगा।