ऑस्ट्रेलिया में चिकित्सा अनुसंधान गहरे संकट में

‘करियर खत्म हो रहे हैं’, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ की चेतावनी

ऑस्ट्रेलिया में चिकित्सा अनुसंधान गहरे संकट में

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया का चिकित्सा अनुसंधान क्षेत्र गहरे संकट से गुजर रहा है। देश के एक वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित हार्ट रिसर्च संस्थान के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात में मेडिकल रिसर्च को करियर के रूप में अपनाना युवाओं के लिए “बेहद असुरक्षित और निराशाजनक” बन चुका है। उन्होंने यहां तक कहा कि वह अब स्वयं युवा वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में आने से हतोत्साहित करने लगे हैं।

विशेषज्ञ के अनुसार, लगातार घटती सरकारी फंडिंग, अल्पकालिक अनुबंधों पर आधारित नौकरियाँ और भविष्य की अनिश्चितता के कारण मेडिकल रिसर्च से जुड़े करियर तेजी से खत्म हो रहे हैं। वर्षों की कठिन पढ़ाई, शोध प्रशिक्षण और अनुभव के बावजूद युवा वैज्ञानिक स्थायी रोजगार पाने में असफल हो रहे हैं। नतीजतन, कई प्रतिभाशाली शोधकर्ता या तो विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं या पूरी तरह इस पेशे को छोड़ने पर मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि यह केवल वैज्ञानिकों की व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ेगा। यदि रिसर्च कमजोर होती है, तो नई दवाओं, उन्नत इलाज पद्धतियों और जटिल बीमारियों पर होने वाला शोध भी प्रभावित होगा। लंबे समय में इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है।

युवा वैज्ञानिकों का भविष्य अधर में

मेडिकल रिसर्च से जुड़े कई युवा वैज्ञानिकों का कहना है कि वे सालों तक पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च करने के बावजूद नौकरी की सुरक्षा महसूस नहीं करते। अनुदान (ग्रांट) न मिलने की स्थिति में पूरी प्रयोगशालाएँ बंद होने की कगार पर आ जाती हैं। इससे न केवल रोजगार छिनता है, बल्कि वर्षों की मेहनत से तैयार किया गया शोध भी अधूरा रह जाता है।

बजट से जगी उम्मीद

इस गंभीर स्थिति के बीच ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार के आगामी बजट से उम्मीदें जुड़ी हैं। माना जा रहा है कि सरकार मेडिकल रिसर्च सेक्टर के लिए लगभग 5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के विशेष पैकेज की घोषणा कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह निवेश सही दिशा में किया गया, तो इससे शोध संस्थानों को स्थिरता मिलेगी, युवाओं के लिए स्थायी नौकरियाँ बनेंगी और ऑस्ट्रेलिया एक बार फिर वैश्विक मेडिकल रिसर्च में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल धन आवंटन पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ-साथ दीर्घकालिक नीति, पारदर्शी फंडिंग व्यवस्था और शोधकर्ताओं के लिए सुरक्षित करियर ढांचा बनाना भी जरूरी है।

चेतावनी और अपील

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि मेडिकल रिसर्च में निवेश को खर्च नहीं, बल्कि भविष्य में स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार समझा जाना चाहिए। यदि अभी निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो देश “एक पूरी पीढ़ी के वैज्ञानिकों” को खो सकता है, जिसकी भरपाई आने वाले वर्षों में असंभव होगी।