कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया के भविष्य पर मंडरा रहे जलवायु संकट की तस्वीर पहले से कहीं अधिक भयावह हो गई है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की सरकार द्वारा जारी क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो देश भीषण आपदाओं, आर्थिक नुकसान और जीवन-जीविका के गंभीर संकट का सामना करेगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले दशकों में ऑस्ट्रेलिया में गर्मी की लहरें (हीटवेव), जंगलों में आग, सूखा और समुद्री तूफ़ान और भी अधिक घातक और बारंबार होंगे। तटीय शहरों को समुद्र-स्तर बढ़ने का सबसे बड़ा ख़तरा है। कृषि और जल संसाधनों पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए अब समय बहुत कम बचा है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि नीतिगत और तकनीकी स्तर पर बड़े बदलाव तुरंत नहीं किए गए, तो ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था और समाज पर अपूरणीय क्षति होगी।
हालाँकि अल्बनीज़ सरकार ने इसे एक गंभीर चेतावनी मानते हुए कहा है कि आने वाले वर्षों में जलवायु नीति और मज़बूत की जाएगी, लेकिन पर्यावरणविदों का कहना है कि अब केवल वादों से काम नहीं चलेगा। ज़रूरत है ठोस कदमों और कठोर फैसलों की।