कोलकाता।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने रविवार को कोलकाता में आयोजित कलकत्ता डिबेटिंग सर्कल की वार्षिक बहस में हिंदुत्व की अवधारणा की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म एक महान, सहिष्णु और आध्यात्मिक परंपरा है, जबकि हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा मात्र है, जिसे डर और असहिष्णुता के आधार पर गढ़ा गया है।
कलकत्ता क्लब में आयोजित इस बहस का विषय था— “क्या हिंदू धर्म को हिंदुत्व से संरक्षण की आवश्यकता है?”
इस विषय पर अपने विचार रखते हुए अय्यर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू धर्म को किसी राजनीतिक विचारधारा के संरक्षण की जरूरत नहीं है।
मणिशंकर अय्यर ने कहा कि हिंदुत्व हिंदू धर्म को भय की स्थिति में प्रस्तुत करता है, जहां 80 प्रतिशत हिंदुओं को 14 प्रतिशत अल्पसंख्यकों से डराया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर समाज में असहिष्णुता, हिंसा और विभाजन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी चर्च में क्रिसमस भोज में शामिल होने पर एक आदिवासी बच्ची के साथ दुर्व्यवहार होता है, तो कहीं शॉपिंग मॉल में क्रिसमस की सजावट तोड़ी जाती है। अय्यर के अनुसार, यह सब धार्मिक सहिष्णुता के खिलाफ है।
अय्यर ने कहा कि हिंदुत्व की अवधारणा 1923 में अस्तित्व में आई, जबकि हिंदू धर्म हजारों वर्षों से मौजूद है। उन्होंने कहा,
“हिंदू धर्म ने इतिहास में अनगिनत कठिनाइयों और संघर्षों का सामना किया, लेकिन बिना हिंदुत्व के भी वह जीवित रहा और फलता-फूलता रहा।”
उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद द्वारा प्रतिपादित हिंदू धर्म को सावरकर के हिंदुत्व से न तो संरक्षित किया जा सकता है और न ही उसका विस्तार संभव है।
गोरक्षा के नाम पर होने वाली कथित हिंसाओं का जिक्र करते हुए अय्यर ने कहा कि यह न केवल अहिंसा, बल्कि हिंदू धर्म की मूल भावना का भी अपमान है। उन्होंने गांधीजी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि गाय की रक्षा के लिए मनुष्य की हत्या करना हिंदू धर्म और अहिंसा—दोनों का खंडन है।
अपने संबोधन के अंत में अय्यर ने कहा कि हिंदू धर्म सार्वभौमिकता, सहिष्णुता और अहिंसा पर आधारित है, जबकि हिंदुत्व एक संकीर्ण राजनीतिक विचारधारा है। उन्होंने दोहराया कि हिंदू धर्म को जीवित रहने के लिए किसी राजनीतिक एजेंडे की आवश्यकता नहीं है।