होर्मुज संकट: भारत के पास 25 दिन का तेल-गैस भंडार, युद्ध लंबा चला तो बढ़ सकती है चिंता

होर्मुज संकट: भारत के पास 25 दिन का तेल-गैस भंडार, युद्ध लंबा चला तो बढ़ सकती है चिंता

नई दिल्ली, 4 मार्च।
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने की चेतावनी ने वैश्विक तेल बाजार में चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कच्चे तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति इसी रास्ते से आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।


होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों—सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और इराक—से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से वैश्विक बाजार तक पहुंचता है।

दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। भारत के लिए भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है।


भारत के पास कितना है तेल भंडार

सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत ने संभावित वैश्विक संकटों से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए हैं।

देश में तीन प्रमुख स्थानों—विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर—में भूमिगत तेल भंडारण सुविधाएं बनाई गई हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) है, जिससे लगभग 10 दिनों की जरूरत पूरी की जा सकती है।

इसके अलावा रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर मौजूद स्टॉक को मिलाकर भारत के पास कुल मिलाकर लगभग 74 दिनों का तेल भंडार उपलब्ध बताया जाता है।


रोजाना 1.5 करोड़ बैरल तेल गुजरता है

विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती है। यदि यह मार्ग बंद हो जाता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर भारी असर पड़ सकता है, जिससे कीमतों में तेजी आने की संभावना है।


भारत पर क्या पड़ सकता है असर

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो भारत को निम्न चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है—

  • कच्चे तेल की आपूर्ति में करीब 10 प्रतिशत तक कमी का खतरा

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में तेजी

  • पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने की संभावना

  • ऊर्जा आयात बिल में वृद्धि

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है। रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई गई है, जिससे जोखिम कुछ हद तक कम हुआ है।


सरकार क्या कर रही है

केंद्र सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को और मजबूत करने पर काम कर रही है। “मिशन समुद्र मंथन” के तहत देश के तेल भंडार को बढ़ाकर 90 दिनों तक ले जाने की योजना है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट के दौरान ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


निष्कर्ष:
फिलहाल भारत के पास तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे तत्काल संकट की आशंका नहीं है। लेकिन यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है।