ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना National Disability Insurance Scheme (NDIS) एक समय लाखों दिव्यांग लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रतीक रही है। लेकिन अब यही योजना तेजी से बढ़ती लागत, अनियमितताओं और दुरुपयोग के कारण गंभीर आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, NDIS का खर्च बढ़कर लगभग 50 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो देश के बजट पर भारी दबाव डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि योजना की शुरुआत अच्छे इरादों के साथ हुई थी—दिव्यांग व्यक्तियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, सहायक उपकरण और स्वतंत्र जीवन जीने का अवसर देना। लेकिन समय के साथ इसमें कई खामियां उजागर हुई हैं।
सबसे बड़ी चिंता योजना के दुरुपयोग को लेकर है। कई मामलों में फर्जी सेवाएं दिखाकर भुगतान लेने, जरूरत से ज्यादा खर्च दिखाने और निगरानी की कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचने में भी बाधा आ रही है।
इसके अलावा, योजना का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। पहले जिन लोगों को सीमित सहायता मिलती थी, अब वे अधिक सेवाओं के लिए पात्र हो गए हैं। इससे लाभार्थियों की संख्या बढ़ी और खर्च भी कई गुना बढ़ गया।
सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं। इसमें खर्च पर नियंत्रण, धोखाधड़ी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाना और पात्रता मानदंडों की समीक्षा शामिल है। हालांकि, यह संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि किसी भी सख्ती से जरूरतमंद लोगों पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि NDIS को बचाने के लिए सुधार जरूरी हैं, लेकिन इसके मूल उद्देश्य—दिव्यांगों को सम्मानजनक जीवन देना—को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।