ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने साफ कर दिया है कि उनके कार्यकाल के दौरान देश को गणराज्य बनाने पर कोई जनमत संग्रह नहीं कराया जाएगा। यह घोषणा उन्होंने स्कॉटलैंड के बालमोरल कैसल में किंग चार्ल्स से मुलाकात के बाद की।
अल्बनीज़ ने बताया कि राजा चार्ल्स ने उन्हें “बेहद शानदार दोपहर भोज” पर आमंत्रित किया था। बातचीत के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने गणराज्य के मुद्दे को उठाया, तो प्रधानमंत्री ने कहा –
“नहीं। मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि प्रधानमंत्री रहते हुए मैं केवल एक जनमत संग्रह कराऊंगा और हमने वह किया। वह था स्वदेशी वॉयस टू पार्लियामेंट का जनमत संग्रह, जो असफल रहा। अब हमारी प्राथमिकता महंगाई जैसी चुनौतियों से निपटना और लोगों की जिंदगी में व्यावहारिक सुधार लाना है।”
प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि स्कॉटलैंड जाकर “ऑस्ट्रेलिया के राजा” से मिलना उन्हें अजीब ज़रूर लगा। हालांकि उन्होंने कहा कि राजा चार्ल्स को यह भलीभांति पता है कि वे व्यक्तिगत रूप से चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख एक ऑस्ट्रेलियाई हो।
लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि वे देश की मौजूदा प्रणाली और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं।
अल्बनीज़ के अनुसार आधुनिक ऑस्ट्रेलिया में शाही परिवार की प्रतिष्ठा बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “पिछले वर्ष जब राजा चार्ल्स और रानी कैमिला ऑस्ट्रेलिया आए थे, उनका बहुत अच्छे से स्वागत किया गया। वे मेहनत करते हैं, राष्ट्रमंडल में हमारी भूमिका को समझने में दिलचस्पी रखते हैं और सम्मानित भी हैं।”
गणराज्य की चर्चा ऑस्ट्रेलिया में लगभग 200 साल से समय-समय पर होती रही है। 1854 के यूरेका स्टॉकैड संघर्ष को छोड़ दें तो देश में कभी कोई वास्तविक क्रांति नहीं हुई।
1990 के दशक में इस मुद्दे पर ज़ोर बढ़ा और 1999 में जनमत संग्रह कराया गया, लेकिन केवल 45.13 प्रतिशत मतदाताओं ने गणराज्य का समर्थन किया।
हाल के सर्वेक्षण भी दर्शाते हैं कि अधिकांश ऑस्ट्रेलियाई मौजूदा संवैधानिक राजतंत्र को बनाए रखना चाहते हैं।
2024 के रॉय मॉर्गन सर्वे में 57% लोगों ने कहा कि वे राजतंत्र के पक्ष में हैं, जबकि 43% ने गणराज्य का समर्थन किया।
2023 के यूगव पोल में भी जनता ने स्पष्ट किया कि वे जल्दबाज़ी में शाही परिवार से नाता तोड़ना नहीं चाहते।
हालाँकि ऑस्ट्रेलियन रिपब्लिकन मूवमेंट का दावा है कि 92% नागरिक किसी न किसी रूप में गणराज्य की अवधारणा के लिए खुले हुए हैं।