कैनबरा – अब ऑस्ट्रेलियाई यात्रियों को फ्लाइट में देरी या रद्द होने पर न केवल रिफंड बल्कि मुआवजे का भी अधिकार मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने पहली बार देशभर में लागू होने वाला एविएशन कंज्यूमर प्रोटेक्शन स्कीम पेश किया है, जो 2026 की शुरुआत से लागू होगी।
इस योजना के तहत:
यात्रियों को उड़ान रद्द या लंबे समय तक देरी होने पर रिफंड, रीबुकिंग या अन्य क्षतिपूर्ति मिलेगी।
टिकट बुकिंग और चेक-इन के समय एयरलाइंस को साफ-साफ सूचना देनी होगी।
देरी की स्थिति में यात्रियों को न्यूनतम सहायता, भोजन और जरुरत पड़ने पर ठहरने की व्यवस्था करनी होगी।
शिकायत निपटान के लिए समयसीमा तय होगी।
परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने कहा, “हमें पता है कि एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स से यात्रियों को शिकायतें रहती हैं। अलग-अलग कंपनियों के नियम अलग होने से यात्रियों को भ्रम की स्थिति रहती है। नई योजना इस भ्रम को दूर करेगी और एयरलाइंस की जिम्मेदारी तय करेगी।”
यूरोप और अमेरिका में पहले से ऐसी स्कीम लागू है, जहां यात्रियों को फ्लाइट 3 घंटे से ज्यादा लेट होने पर €600 (लगभग ₹90,000) तक मुआवजा मिलता है। साथ ही भोजन और रातभर रुकने की व्यवस्था भी एयरलाइंस की जिम्मेदारी होती है।
ऑस्ट्रेलियाई उपभोक्ता आयोग (ACCC) की रिपोर्ट बताती है कि:
2024 में क़ांतास (Qantas) का कैंसिलेशन रेट 3.2% रहा, जो वर्जिन (Virgin) से दोगुना है।
जेटस्टार (Jetstar) का कैंसिलेशन रेट सबसे कम 1.1% रहा।
अक्टूबर 2024 में क़ांतास को 82,000 “घोस्ट फ्लाइट” टिकट बेचने पर $100 मिलियन तक का जुर्माना लगा।
कई मामलों में यात्रियों को कैंसिलेशन की सूचना 11 दिन बाद दी गई, और कभी-कभी 67 दिन तक।
सरकार इस हफ्ते चार हफ्ते की सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया शुरू कर रही है। संसद से कानून पारित होने के बाद इसे 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।