वॉशिंगटन। अमेरिका के खगोल भौतिकविद और लेखक एडम बेकर ने स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क के मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने के सपने को आड़े हाथों लेते हुए इसे "अब तक की सबसे मूर्खतापूर्ण चीज़" करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह वैज्ञानिक सोच के बिल्कुल विपरीत है और तकनीकी अरबपति विज्ञान की सच्ची समझ नहीं रखते।
"विज्ञान का मूल है संदेह"
एडम बेकर ने रोलिंग स्टोन को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “विज्ञान में सबसे ज़रूरी बात यह होती है कि आप अपनी मान्यताओं पर सवाल उठाएं। लेकिन तकनीकी दिग्गज अक्सर खुद को गलत नहीं मानते, यही उनकी सबसे बड़ी कमी है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्क जैसे लोग जिन्हें लोग वैज्ञानिक सोच वाला मानते हैं, वास्तव में विज्ञान की बुनियादी समझ से कोसों दूर हैं। “एलन मस्क की मंगल बसाने की योजना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि यह पर्यावरण, संसाधन और मानव जीवन की वास्तविक सीमाओं को नजरअंदाज करती है,” बेकर ने कहा।
मंगल को ‘लाइफबोट’ मानते हैं मस्क
एलन मस्क का मानना है कि यदि पृथ्वी पर कोई विनाशकारी आपदा आती है, तो मानव सभ्यता को बचाने के लिए मंगल एक 'लाइफबोट' बन सकता है। मस्क का दावा है कि आने वाले 20 वर्षों में मंगल पर कांच के गुंबदों के भीतर एक लाख लोगों की आत्मनिर्भर बस्ती बसाई जा सकती है।
मस्क ने एक पॉडकास्ट में कहा था, “सबसे जरूरी बात यह है कि हम जल्द से जल्द मंगल पर एक आत्मनिर्भर शहर बनाएं, जो पृथ्वी से आपूर्ति बंद हो जाने पर भी फल-फूल सके।”
वैज्ञानिकों की चेतावनी
लेकिन वैज्ञानिक समुदाय इस सपने को अव्यावहारिक और गैर-जिम्मेदार मानता है। उनका कहना है कि पृथ्वी की समस्याओं का हल पृथ्वी पर ही खोजना होगा, न कि करोड़ों किलोमीटर दूर एक निर्जन, बंजर और शून्य ऑक्सीजन वाले ग्रह पर।
निष्कर्ष
एडम बेकर की इस तीखी आलोचना से एक बार फिर बहस छिड़ गई है कि क्या तकनीकी नवाचार मानवता की भलाई के लिए है या केवल अरबपतियों के निजी एजेंडे का हिस्सा। मंगल मिशन रोमांचक अवश्य है, लेकिन क्या यह वास्तव में व्यवहारिक और ज़रूरी है?