मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका द्वारा ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों पर अपने अत्याधुनिक बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक विमानों की संभावित तैनाती की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को “बड़े हमले” या “बड़ी लहर” की चेतावनी दी है, जिसके बाद सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी बी-2 बमवर्षक जल्द ही ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड (ग्लूस्टरशायर) एयरबेस और हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे पर तैनात किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि इन ठिकानों से अमेरिका और इजरायल के संभावित संयुक्त सैन्य अभियान को रणनीतिक मजबूती मिल सकती है।
रिपोर्ट्स में क्या कहा गया है
ब्रिटिश मीडिया और अमेरिकी समाचार संस्थानों की रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने शुरुआती दौर में अमेरिकी विमानों को अपने ठिकानों से संचालन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में ईरान की ओर से कथित मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाओं के बाद उन्होंने सीमित रक्षात्मक उद्देश्यों के तहत अमेरिकी विमानों को ब्रिटिश बेस के इस्तेमाल की अनुमति दे दी।
सूत्रों के अनुसार, इस अनुमति का उद्देश्य मुख्य रूप से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना और संभावित हमलों को रोकना बताया जा रहा है।
बी-2 स्टील्थ बमवर्षक क्यों महत्वपूर्ण
बी-2 स्पिरिट दुनिया के सबसे उन्नत और महंगे स्टील्थ बमवर्षकों में से एक माना जाता है। इसकी कीमत प्रति विमान लगभग 2 अरब डॉलर बताई जाती है। यह विमान रडार से बचते हुए लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में सक्षम है और अत्यधिक संरक्षित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव
हाल के महीनों में ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान समर्थित समूहों द्वारा इजरायल, खाड़ी देशों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में अमेरिका की यह सैन्य तैयारी क्षेत्र में संभावित बड़े सैन्य अभियान की आशंका को और बढ़ा रही है।
हालांकि अभी तक अमेरिका, ब्रिटेन या नाटो की ओर से इस तैनाती को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बी-2 बमवर्षक वास्तव में इन ठिकानों पर पहुंचते हैं, तो यह मध्य-पूर्व में संभावित सैन्य कार्रवाई का स्पष्ट संकेत हो सकता है।