वेटिकन सिटी, जिसे दुनिया भर में कैथोलिक चर्च की आत्मा कहा जाता है, अब एक ऐसे वित्तीय तूफान की कगार पर खड़ा है, जो सदियों पुरानी इसकी प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुंचा सकता है। हाल ही में सामने आए एक विस्फोटक खुलासे ने वेटिकन के भीतर के गुप्त वित्तीय लेन-देन और भ्रष्टाचार पर गहन सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह ‘स्मोकिंग गन’ – यानी ऐसे दस्तावेज और सबूत – जो अब सामने आ रहे हैं, की शुरुआत की थी स्वर्गीय कार्डिनल जॉर्ज पेल ने। पेल ने वेटिकन के वित्तीय तंत्र में पारदर्शिता लाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। उनके साथ इस मुहिम में थे वेटिकन के पहले स्वतंत्र ऑडिटर जनरल – लिबेरो मिलोने, जिन्हें 2015 में नियुक्त किया गया था।
माना जा रहा है कि इन दोनों ने कुछ ऐसे वित्तीय अनियमितताओं की परतें खोली थीं, जो दशकों से पर्दे के पीछे छिपी थीं। अरबों यूरो के अपारदर्शी फंड ट्रांसफर, संदिग्ध निवेश और गुप्त संपत्तियों की जानकारी सामने आने के बाद, वेटिकन के कई शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
क्या है इस रहस्य का मूल?
सूत्रों के अनुसार, कार्डिनल पेल और मिलोने को वित्तीय धोखाधड़ी, झूठे खाते और गुप्त संपत्तियों के सबूत हाथ लगे थे, जो वेटिकन बैंक (IOR) और सचिवालय के बीच घूमते रहे। इन जानकारियों को सार्वजनिक करने से पहले ही पेल पर ऑस्ट्रेलिया में यौन शोषण का मुकदमा हुआ, जिससे उन्हें लंबे समय तक अपनी छवि बचाने में ही जुटना पड़ा। हालांकि बाद में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
लिबेरो मिलोने को 2017 में बिना कारण बताए इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया, और उसके बाद वे चुपचाप वेटिकन से बाहर हो गए। लेकिन अब उनके पास मौजूद दस्तावेज़ और रिपोर्ट्स ने वेटिकन की नींव को हिलाना शुरू कर दिया है।
वेटिकन की प्रतिक्रिया और संभावित परिणाम
वेटिकन अब इन खुलासों से बचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अंदरखाने हलचल तेज है। यदि ये दस्तावेज और उनके आधार पर कानूनी जांच पूरी तरह शुरू होती है, तो यह वेटिकन के इतिहास की सबसे बड़ी वित्तीय जांच बन सकती है।
इस पूरे मामले पर वेटिकन की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कई उच्च पदस्थ अधिकारी अब अपने पद और प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित हैं।