अमीरों पर नया टैक्स प्लान, अर्थव्यवस्था पर खतरे की घंटी

अमीरों पर नया टैक्स प्लान, अर्थव्यवस्था पर खतरे की घंटी

ऑस्ट्रेलिया में एक नया कर प्रस्ताव चर्चा में है, जिसने आर्थिक हलकों में गर्म बहस छेड़ दी है। ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट ने इस हफ्ते होने वाले इकनॉमिक रिफॉर्म राउंडटेबल से पहले अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि 5 करोड़ रुपये (लगभग 5 मिलियन डॉलर) से अधिक संपत्ति वाले लोगों पर 2% का वार्षिक वेल्थ टैक्स लगाया जाए।

संस्थान का दावा है कि यह टैक्स हर साल लगभग 41 अरब डॉलर जुटा सकता है। इसके अलावा, रिपोर्ट में उत्तराधिकार कर (इनहेरिटेंस टैक्स) की वापसी और कैपिटल गेन टैक्स छूट खत्म करने की सिफारिश भी की गई है। तीनों सुधारों से सरकार को लगभग 70 अरब डॉलर सालाना अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।


विशेषज्ञों की चेतावनी – “खतरनाक फैसला”

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कई अर्थशास्त्री चिंता जता रहे हैं। एएमपी (AMP) के मुख्य अर्थशास्त्री शेन ओलिवर ने कहा कि यह कदम अर्थव्यवस्था के लिए “बेहद खतरनाक” साबित हो सकता है।

उनका तर्क है कि ऑस्ट्रेलिया की टैक्स प्रणाली पहले से ही प्रगतिशील है और शीर्ष 10% कमाई करने वाले लोग पहले से ही लगभग 50% आयकर भरते हैं।

ओलिवर का कहना है,

“शुरुआत में बजट को फायदा हो सकता है, लेकिन लंबे समय में यह काम करने और व्यवसाय शुरू करने की प्रेरणा को खत्म कर देगा। धन कर (Wealth Tax) लोगों के उद्यमशीलता के उत्साह को नुकसान पहुंचाएगा।”


राउंडटेबल में अन्य विवादित प्रस्ताव

इसी आर्थिक सम्मेलन से पहले सिडनी और मेलबर्न विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रियों ने परिवार के घर पर कैपिटल गेन टैक्स छूट खत्म करने का सुझाव दिया था। हालांकि, इसे सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।

सम्मेलन के अंतिम दिन ग्रैटन इंस्टीट्यूट की सीईओ अरुणा सत्थानापल्ली ने भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया मजदूरी पर अधिक टैक्स लगाता है जबकि पूंजीगत लाभ, सुपरएन्युएशन और रियल एस्टेट निवेश को कई तरह की छूट मिलती है। उन्होंने सुझाव दिया कि—

  • रिटायरमेंट के दौरान सुपरएन्युएशन पर भी कम से कम कुछ टैक्स लगाया जाए,

  • कैपिटल गेन टैक्स छूट कम की जाए,

  • फैमिली ट्रस्ट्स में सुधार हो,

  • और वेतन को अन्य आय से अलग टैक्स प्रणाली में शामिल किया जाए।


सरकार की दुविधा

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने हालांकि यह साफ कर दिया है कि जीएसटी (GST) में बदलाव नहीं होगा क्योंकि इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।

वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार बजट सुधार और उत्पादकता वृद्धि जैसे दो अलग-अलग उद्देश्यों को एक साथ मिलाकर देख रही है, जो संभवतः विरोधाभासी हैं।


👉 निष्कर्ष साफ है: अमीरों पर टैक्स बढ़ाने से सरकार को अरबों डॉलर मिल सकते हैं, लेकिन यह सवाल अभी भी बाकी है कि क्या इससे देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा या उल्टा नुकसान होगा।