‘अल्बो’ बियर हाथ में, ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने फ़ैरेज से बनाई दूरी

स्टार्मर बोले – रिफ़ॉर्म यूके सिर्फ़ ‘शिकायत की राजनीति’ कर रही

‘अल्बो’ बियर हाथ में, ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने फ़ैरेज से बनाई दूरी

लंदन।
ब्रिटेन की सियासत में इन दिनों नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ (Anthony Albanese) ब्रिटेन दौरे पर हैं। शुक्रवार की शाम उन्हें लंदन की सड़कों पर हाथ में ‘अल्बो’ नामक बियर का गिलास लिए देखा गया। इसी बीच उन्होंने साफ़ शब्दों में ऐलान किया कि वे रिफ़ॉर्म यूके (Reform UK) के नेता नाइजेल फ़ैरेज (Nigel Farage) से कोई मुलाक़ात नहीं करेंगे।

फ़ैरेज की बढ़ती लोकप्रियता से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल

ब्रिटेन के ताज़ा जनमत सर्वेक्षणों में नाइजेल फ़ैरेज और उनकी पार्टी रिफ़ॉर्म यूके बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। हैरत की बात यह है कि पार्टी लेबर और कंजरवेटिव जैसे पारंपरिक बड़े दलों से भी आगे निकलती नज़र आ रही है।
फ़ैरेज की राजनीति ब्रेक्ज़िट (Brexit) के बाद से लगातार विवादों में रही है। उन पर अक्सर प्रवासियों के खिलाफ़ बयानबाज़ी करने और ध्रुवीकरण वाली राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे माहौल में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का उनसे दूरी बनाना एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।

अल्बनीज़ का रुख़

अल्बनीज़ ने कहा कि वे “उस राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते जो समाज में विभाजन और भय को बढ़ावा देती है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतरराष्ट्रीय नेताओं की ज़िम्मेदारी लोगों को जोड़ने की है, न कि उन्हें अलग-अलग खेमों में बाँटने की। उनके इस बयान से यह साफ़ है कि वे ब्रिटेन की राजनीति में उभर रही नई दक्षिणपंथी ताक़त से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।

लेबर नेता स्टार्मर का हमला

ब्रिटेन में लेबर पार्टी के प्रमुख कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने भी इस अवसर पर फ़ैरेज और उनकी पार्टी को आड़े हाथों लिया। स्टार्मर ने कहा कि रिफ़ॉर्म यूके सिर्फ़ “शिकायत और ग़ुस्से की राजनीति” करती है। उनके मुताबिक, “फ़ैरेज और उनकी पार्टी जनता की असल समस्याओं जैसे रोज़गार, महँगाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देने की बजाय ग़ुस्से और असंतोष को हवा देती है।”

ब्रिटेन की राजनीति पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का यह रुख़ और स्टार्मर का हमला, दोनों मिलकर ब्रिटेन की बदलती राजनीतिक ज़मीन को उजागर करते हैं। पारंपरिक पार्टियाँ अब इस बात से चिंतित हैं कि दक्षिणपंथी ध्रुवीकरण की राजनीति कहीं स्थायी रूप से उनकी पकड़ को कमज़ोर न कर दे।

अंतरराष्ट्रीय संदेश

अल्बनीज़ का फ़ैरेज से मिलने से इनकार केवल ब्रिटेन तक सीमित घटना नहीं है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक संदेश माना जा रहा है कि लोकतांत्रिक देशों को ऐसी राजनीति से बचना चाहिए जो समाज में विभाजन और संदेह पैदा करती है।