नई दिल्ली, 26 जनवरी।
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राष्ट्र की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। इस वर्ष की परेड की सबसे खास झलक रही सेना के शौर्य की तीन पीढ़ियों की सहभागिता, विदेशी सैन्य टुकड़ी की मौजूदगी और परेड की अगुवाई करतीं सिमरन बाला।
परेड में भारतीय सेना के उस गौरवशाली सफर को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें दादा, पिता और पुत्र—तीनों पीढ़ियों के सैनिक एक साथ मार्च करते दिखाई दिए। यह दृश्य न केवल सैन्य परंपरा की निरंतरता का प्रतीक बना, बल्कि देशवासियों के लिए भावनात्मक गर्व का क्षण भी रहा।
इस वर्ष परेड में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की झलक भी देखने को मिली। यूरोपीय संघ के एक मित्र देश की सैन्य टुकड़ी ने विदेशी ध्वज के साथ मार्च कर भारत की वैश्विक कूटनीतिक और रक्षा साझेदारियों को रेखांकित किया। दर्शकों ने इस सहभागिता का तालियों से स्वागत किया।
परेड की अगुवाई कर रहीं सिमरन बाला ने अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व का शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके नेतृत्व में मार्च करते दस्तों ने यह संदेश दिया कि भारतीय सेना में महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका में भी अग्रिम पंक्ति में हैं।
कार्यक्रम के दौरान आधुनिक सैन्य उपकरणों, स्वदेशी रक्षा तकनीक और हालिया अभियानों से जुड़े झांकियों का भी प्रदर्शन किया गया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से प्रेरित झांकी ने सेना की त्वरित कार्रवाई क्षमता और रणनीतिक दक्षता को उजागर किया।
कुल मिलाकर, कर्तव्य पथ पर सजी ये झलकियां सिर्फ परेड नहीं थीं, बल्कि भारत की सैन्य विरासत, वर्तमान सामर्थ्य और भविष्य की दिशा का सशक्त संदेश थीं—जिसने हर भारतीय के मन में गर्व और विश्वास को और मजबूत किया।