ऑस्ट्रेलिया के चर्चित कलाकार पर लगे आरोपों ने बदली ज़िंदगी, जेल का दर्दनाक सच आया सामने

ऑस्ट्रेलिया के चर्चित कलाकार पर लगे आरोपों ने बदली ज़िंदगी, जेल का दर्दनाक सच आया सामने

सिडनी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके ऑस्ट्रेलियाई स्ट्रीट आर्टिस्ट एंथनी लिस्टर ने जेल में बिताए अपने अनुभवों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यौन शोषण के आरोपों के चलते वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले लिस्टर को आखिरकार सभी मामलों में निर्दोष करार दिया गया, लेकिन जेल में बिताया समय उनकी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल गया।

2020 में सिडनी स्थित उनके घर पर पुलिस छापे के बाद लिस्टर पर चार महिलाओं के साथ बलात्कार और एक महिला को बिना सहमति टैटू करने के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के बाद न सिर्फ उनका करियर ठप पड़ गया, बल्कि देश-विदेश की कला दीर्घाओं ने भी उनसे दूरी बना ली। वोलोंगोंग आर्ट गैलरी में लगने वाली उनकी प्रदर्शनी रद्द कर दी गई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले प्रोजेक्ट्स बंद हो गए।

लगभग छह वर्षों तक चले मुकदमों और दो जूरी ट्रायल के बाद अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि इस दौरान उन्हें जमानत से इनकार के चलते तीन बार जेल जाना पड़ा।

जेल के भीतर का भयावह अनुभव

लिस्टर ने बताया कि जेल का अनुभव बेहद अमानवीय और डरावना था। उन्होंने खुलासा किया कि एक बार उन्होंने पास की कोठरी में एक कैदी के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न को सुना, जहां अन्य कैदी उस घटना पर हंस रहे थे और तालियाँ बजा रहे थे।

उनका कहना है कि ऐसे माहौल में हर पल जान का खतरा महसूस होता है। “जेल में यह तय नहीं होता कि अगला शिकार कौन होगा। यह अनिश्चितता इंसान को अंदर से तोड़ देती है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जेल में उनके साथ शारीरिक हमला भी हुआ, हालांकि वे इस पर अधिक विस्तार से बात करने से बचते रहे।

न्याय मिलने के बाद भी घाव बाकी

निर्दोष साबित होने के बावजूद लिस्टर मानते हैं कि समाज में लगे आरोपों का दाग आसानी से नहीं मिटता। उनका कहना है कि जेल और मुकदमों ने उनके सोचने-समझने के तरीके को बदल दिया है, लेकिन कला ही एकमात्र चीज़ है जिसने उन्हें मानसिक रूप से जीवित रखा।

वे अब सिडनी के डार्लिंगहर्स्ट इलाके में एक छोटे स्टूडियो में काम कर रहे हैं और अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

‘न्याय ज़रूरी है, लेकिन सच्चाई भी’

लिस्टर ने कहा कि वे महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा के विरोधी हैं और मानते हैं कि दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए, लेकिन बिना सबूत लगाए गए आरोप किसी निर्दोष की ज़िंदगी भी तबाह कर सकते हैं।

यह मामला ऑस्ट्रेलिया में न्याय व्यवस्था, मीडिया ट्रायल और जेलों की स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।