मुंबई सीरियल ब्लास्ट समेत कई संगीन आपराधिक मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहा अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम एक बार फिर चर्चा में है। अपने बड़े भाई के निधन के बाद अबू सलेम ने इमरजेंसी परोल की मांग की है। इस संबंध में उसने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ स्थित अपने पैतृक गांव जाने की अनुमति मांगी है।
याचिका में अबू सलेम ने बताया है कि उसके बड़े भाई का हाल ही में निधन हो गया है और वह पारिवारिक दायित्वों के तहत अंतिम संस्कार एवं अन्य धार्मिक रस्मों में शामिल होना चाहता है। सलेम का कहना है कि भाई की बीमारी के दौरान भी वह उनसे नहीं मिल सका और अब निधन के बाद परिवार को उसकी मौजूदगी की आवश्यकता है।
अबू सलेम के वकील की ओर से अदालत को बताया गया कि इससे पहले भी जेल प्रशासन के समक्ष परोल के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों और समय पर सुनवाई न होने के चलते वह आवेदन आगे नहीं बढ़ पाया। शीतकालीन अवकाश के कारण भी मामला लंबित रहा। इसी के चलते अब इमरजेंसी परोल की मांग की गई है।
अदालत में सुनवाई के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि निधन को कुछ समय बीत चुका है। इस पर सलेम के वकील ने दलील दी कि मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार कुछ धार्मिक क्रियाएं और पारिवारिक रस्में बाद में भी निभाई जाती हैं, जिनमें शामिल होना सलेम के लिए आवश्यक है।
गौरतलब है कि अबू सलेम 1993 के मुंबई बम धमाकों, एक प्रमुख बिल्डर की हत्या सहित अन्य मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और वह फिलहाल नासिक सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है। सुरक्षा एजेंसियां पहले भी उसकी परोल और फरलो को लेकर सतर्कता जताती रही हैं।
अब इस मामले में हाईकोर्ट को तय करना है कि मानवीय आधार पर अबू सलेम को सीमित अवधि के लिए परोल दी जाए या नहीं। अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला एक बार फिर अपराध, कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन के सवाल को सामने लाता है।