नई दिल्ली।
टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त स्वामित्व वाली एअर इंडिया के लिए वित्त वर्ष 2025-26 मुश्किलों भरा साबित होता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे और पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद किए जाने के चलते एयरलाइन को करीब 1.6 अरब डॉलर (लगभग ₹15,000 करोड़) के रिकॉर्ड घाटे का सामना करना पड़ सकता है।
यह संभावित घाटा एयर इंडिया के टर्नअराउंड प्लान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जून में हुए हादसे से पहले एयरलाइन के प्रबंधन को उम्मीद थी कि चालू वित्त वर्ष में परिचालन स्तर पर ब्रेक-ईवन हासिल कर लिया जाएगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने मुनाफे की राह को और कठिन बना दिया है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस की साझेदारी वाली इस एयरलाइन को पिछले तीन वित्त वर्षों में कुल ₹32,210 करोड़ का नुकसान हो चुका है। बीते वर्ष ही कंपनी को परिचालन जारी रखने के लिए लगभग ₹10,000 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ी थी।
एयर इंडिया की वित्तीय सेहत पर सबसे गहरा असर अहमदाबाद में हुए ड्रीमलाइनर विमान हादसे का पड़ा, जिसमें 240 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। इस त्रासदी ने न केवल एयरलाइन की छवि को नुकसान पहुंचाया, बल्कि उसके विस्तार और सुधार की रफ्तार भी धीमी कर दी।
इसके साथ ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद किए जाने से यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन खर्च और परिचालन लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, एयर इंडिया का बोर्ड प्रबंधन की मौजूदा रणनीति से संतुष्ट नहीं है। हाल ही में पेश की गई एक नई पंचवर्षीय योजना, जिसमें तीसरे वर्ष से मुनाफे का अनुमान था, को बोर्ड ने खारिज कर दिया। बोर्ड अब टर्नअराउंड के लिए अधिक आक्रामक और तेज़ सुधारात्मक कदम चाहता है।
इसी क्रम में, टाटा समूह ने मौजूदा मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन के स्थान पर नए नेतृत्व की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि, अंतिम फैसला विमान हादसे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जा सकता है।
विस्तारा के एयर इंडिया में विलय के बाद सिंगापुर एयरलाइंस की हिस्सेदारी बढ़कर 25.1 प्रतिशत हो गई है। ऐसे में एयर इंडिया का खराब प्रदर्शन उसके विदेशी साझेदार की आय पर भी दबाव बना रहा है। पुनर्गठन योजना के तहत मेंटेनेंस और ऑपरेशनल सुधारों में सहयोग के बावजूद, मौजूदा हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं।
भारतीय विमानन बाजार में यात्रियों की बढ़ती सतर्कता, उड़ानों के रद्द होने की घटनाएं और प्रतिस्पर्धा भी एयर इंडिया की चुनौतियों को और जटिल बना रही हैं।