कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री Anthony Albanese ने ऑस्ट्रेलिया डे के अवसर पर देशवासियों से एकजुट रहने और एक-दूसरे पर विश्वास बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हालिया महीनों में देश ने कठिन और विभाजनकारी दौर देखा है, लेकिन ऐसे समय में ऑस्ट्रेलियाई समाज की करुणा, साहस और आपसी सहयोग की भावना सबसे अधिक उभरकर सामने आई है।
प्रधानमंत्री का यह संदेश दिसंबर में बॉन्डी बीच में हुए भीषण आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें 15 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और सामाजिक एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर गंभीर चर्चा शुरू हुई।
अपने राष्ट्रीय संबोधन में प्रधानमंत्री अल्बानीज़ ने स्वीकार किया कि बीता समय देश के लिए “परीक्षा की घड़ी” रहा है, लेकिन उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की असली पहचान संकट के समय सामने आती है।
उन्होंने कहा,
“ऑस्ट्रेलिया डे वह दिन है जब हम उन सभी मूल्यों का उत्सव मनाते हैं जो हमें एक राष्ट्र के रूप में जोड़ते हैं। यह देश संयोग से महान नहीं बना है, बल्कि पीढ़ियों से किए गए सेवा, साहस और दयालुता के कार्यों से बना और सशक्त हुआ है।”
प्रधानमंत्री ने देश के इतिहास का उल्लेख करते हुए स्वदेशी समुदायों के योगदान को भी सम्मानपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए सौभाग्य की बात है कि वह दुनिया की सबसे प्राचीन सतत सभ्यता की भूमि साझा करता है, जिसकी विरासत और सहनशीलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने नागरिकता समारोहों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे किसी के पूर्वज 65,000 वर्षों से इस भूमि से जुड़े हों या कोई आज ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बन रहा हो—सबकी साझा जिम्मेदारी है कि देश को अधिक मजबूत और न्यायपूर्ण बनाया जाए।
इस अवसर पर विपक्ष की नेता Sussan Ley ने भी एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई समाज को जोड़ने वाली ताकतें किसी भी विभाजन से कहीं अधिक बड़ी हैं।
कोरोवा में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए—जिसे ऑस्ट्रेलियाई संघ का जन्मस्थल माना जाता है—उन्होंने कहा,
“ऑस्ट्रेलिया उन लोगों द्वारा बनाया गया है जिन्होंने मिलकर काम करने, भविष्य को आकार देने और उसकी जिम्मेदारी लेने में विश्वास रखा। यही भावना आज भी हमारे देश की पहचान है।”
सुश्री ले ने कहा कि इस वर्ष का ऑस्ट्रेलिया डे बॉन्डी हमले के कारण और भी अधिक अर्थपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी ने देश की सुरक्षा की भावना को झकझोर दिया, लेकिन उसी अंधकार में ऑस्ट्रेलियाइयों का साहस और मानवता भी सामने आई।
उन्होंने कहा,
“लोगों ने अजनबियों की मदद के लिए खतरे की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने घायलों को सांत्वना दी और यह स्पष्ट कर दिया कि नफरत और हिंसा कभी भी ऑस्ट्रेलिया की पहचान नहीं बन सकती।”
दोनों नेताओं ने देशवासियों से आने वाले वर्ष की ओर आशा और विश्वास के साथ देखने तथा राष्ट्रीय गर्व और आपसी विश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।