अल्बानीज़ सरकार के नफ़रत भाषण विधेयक पर सवाल, यहूदी संगठन ने जताई गंभीर आपत्ति

अल्बानीज़ सरकार के नफ़रत भाषण विधेयक पर सवाल, यहूदी संगठन ने जताई गंभीर आपत्ति

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की अल्बानीज़ सरकार द्वारा प्रस्तावित नए नफ़रत भाषण (हेट स्पीच) क़ानूनों को लेकर देश के प्रमुख यहूदी संगठन ने गंभीर चेतावनी जारी की है। संगठन का कहना है कि यदि विधेयक की “महत्वपूर्ण कमियों” को दूर नहीं किया गया, तो सरकार को आने वाले वर्षों में फिर से इसी मुद्दे पर लौटना पड़ेगा।

एग्जीक्यूटिव काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलियन ज्यूरी (ECAJ) के सह-मुख्य कार्यकारी पीटर वर्टहाइम ने संसद की संयुक्त समिति के समक्ष कहा कि सरकार के प्रस्तावों में कुछ सकारात्मक पहलू ज़रूर हैं, लेकिन मौजूदा रूप में यह क़ानून नफ़रत फैलाने वालों को रोकने में नाकाफ़ी साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा,

“यदि इन खामियों को अभी नहीं सुधारा गया, तो दो साल बाद हम फिर यही सवाल पूछते नज़र आएँगे कि आख़िर ग़लती कहाँ हुई।”

सरकार का प्रस्ताव क्या है

एंथनी अल्बानीज़ के नेतृत्व वाली लेबर सरकार नफ़रत भाषण, आव्रजन और आग्नेयास्त्र (फ़ायरआर्म्स) क़ानूनों में बड़े बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित ओम्निबस बिल के तहत:

  • बच्चों को कट्टरपंथी बनाने वाले नफ़रत उपदेशकों के ख़िलाफ़ नए अपराध तय किए जाएँगे

  • नस्लीय घृणा भड़काने को आपराधिक कृत्य बनाया जाएगा

  • प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों की सदस्यता को अपराध माना जाएगा

  • राष्ट्रीय स्तर पर सह-वित्तपोषित हथियार ‘बाय-बैक’ योजना लाई जाएगी

  • राज्यों को बंदूक लाइसेंस केवल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों तक सीमित करने की शक्ति मिलेगी

धार्मिक शिक्षण को छूट पर कड़ा विरोध

ECAJ की सबसे बड़ी आपत्ति उस प्रावधान को लेकर है, जिसमें धार्मिक ग्रंथों के उद्धरण को “धार्मिक शिक्षण” के उद्देश्य से नफ़रत भाषण क़ानून से छूट दी गई है।

पीटर वर्टहाइम ने इसे “पूरी तरह ग़लत और पुरानी सोच” करार देते हुए कहा कि कोई भी मान्यता प्राप्त धर्म जानबूझकर नस्लीय नफ़रत को बढ़ावा देने का समर्थन नहीं करता।

उनका कहना है कि इस तरह की छूट अभियोजन एजेंसियों को मुक़दमा चलाने से हतोत्साहित कर सकती है, क्योंकि आरोपी केवल यह दावा कर सकता है कि वह धार्मिक पाठ पढ़ा रहा था।

‘इंतिफ़ादा को वैश्विक बनाओ’ नारे पर बहस

सुनवाई के दौरान विवादास्पद नारे “ग्लोबलाइज़ द इंतिफ़ादा” पर भी चर्चा हुई। यहूदी संगठनों का कहना है कि यह नारा यहूदियों के ख़िलाफ़ हिंसा के आह्वान के रूप में देखा जाता है, जबकि कुछ समूह इसे राजनीतिक प्रतिरोध की भाषा बताते हैं।

ECAJ ने चेतावनी दी कि ऑस्ट्रेलिया की अधिकांश आबादी इस शब्द के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ से अनजान है, जिससे अदालतों के लिए इसके निहितार्थ समझना मुश्किल हो सकता है।

सरकारी पक्ष और सुरक्षा एजेंसियों का रुख

अटॉर्नी-जनरल विभाग ने स्पष्ट किया कि धार्मिक ग्रंथों से “सिर्फ़ उद्धरण” को अपराध से बाहर रखने का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है। वहीं, ऑस्ट्रेलियन फ़ेडरल पुलिस (AFP) और ASIO ने कहा कि विधेयक के कुछ प्रावधान सामुदायिक सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेंगे, लेकिन अंतिम प्रभाव अदालतों के फ़ैसलों पर निर्भर करेगा।