कैनबरा।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच एक और बातचीत हुई है। गुरुवार रात हुई इस चौथी टेलीफोन वार्ता में दोनों नेताओं ने व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और साझा सुरक्षा हितों पर चर्चा की। बातचीत को प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने "गरमजोशी और रचनात्मक" बताया।
लेकिन सवाल अब भी यही है—क्या इन फोन कॉल्स के बाद दोनों नेता आमने-सामने भी मिलेंगे?
प्रधानमंत्री कार्यालय की जानकारी के मुताबिक, बातचीत में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को मज़बूत करने पर जोर दिया गया। खासकर, ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका को होने वाली क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर विचार-विमर्श हुआ।
विपक्ष ने इस पर नाराज़गी जताई है कि ट्रम्प के पुनर्निर्वाचन को 300 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दोनों नेताओं की कोई प्रत्यक्ष बैठक नहीं हो पाई है।
लिबरल पार्टी की सीनेटर जेन ह्यूम ने कहा, “प्रधानमंत्री को अमेरिका के साथ सीधे संवाद सुनिश्चित करना चाहिए। AUKUS समझौते पर पुनरीक्षण चल रहा है, ऐसे में आमने-सामने बातचीत बेहद ज़रूरी है। हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी शुल्कों से सुरक्षित रहे।”
वहीं, श्रम मंत्री अमांडा रिशवर्थ ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि चार बार फोन पर बात होना दोनों नेताओं के बीच मजबूत रिश्ते का संकेत है। उन्होंने कहा, “कभी-कभी तो मुझे अपने दोस्तों से भी इतनी बार फोन पर बात करने का मौका नहीं मिलता। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच स्पष्ट जुड़ाव है।”
याद रहे कि जून में जी7 सम्मेलन के दौरान अल्बनीज़ और ट्रम्प की मुलाक़ात प्रस्तावित थी, लेकिन इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के चलते ट्रम्प ने अपना कार्यक्रम बदल दिया और बैठक रद्द हो गई। तब से अब तक केवल फोन कॉल्स के ज़रिए ही बातचीत हो रही है।
अब सबकी निगाहें अगले महीने न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) पर हैं। अटकलें हैं कि यहां दोनों नेता आमने-सामने बैठ सकते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है।