ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स (NSW) में फोरेंसिक डीएनए तकनीक की मदद से एक कथित बाल दुष्कर्म आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी राज्य में इस उन्नत तकनीक के उपयोग का पहला बड़ा मामला है।
पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान आधुनिक जीन संबंधी विश्लेषण (genetic analysis) के माध्यम से की गई। यह वही तकनीक है जिसने पहले कई गलत तरीके से सजा पाए लोगों को रिहा करवाने और कुख्यात सीरियल किलर्स को गिरफ्तार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फोरेंसिक पद्धति में अपराध स्थल से मिले डीएनए नमूनों की तुलना बड़े आनुवंशिक डेटाबेस से की जाती है। यदि सीधे मिलान (match) न मिले, तो पारिवारिक संबंधों (family matching) के जरिए संभावित संदिग्धों तक पहुंचा जाता है।
इस तकनीक को विश्व स्तर पर पहचान तब मिली जब अमेरिका में दशकों पुराने मामलों को सुलझाने में इसका उपयोग किया गया। इससे पहले भी कई ऐसे मामलों में सफलता मिली है, जहां पारंपरिक जांच पद्धतियां विफल रही थीं।
NSW पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि विज्ञान और तकनीक अपराध जांच में कितनी प्रभावी हो सकती है। हालांकि, गोपनीयता और नागरिक अधिकारों को लेकर कुछ विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की जरूरत पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि डीएनए डेटा के उपयोग और संरक्षण के लिए स्पष्ट नियम और निगरानी आवश्यक हैं।
गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित मामलों की भी समीक्षा कर रही है, जिनमें इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फोरेंसिक डीएनए तकनीक आने वाले समय में आपराधिक मामलों को सुलझाने में और अधिक प्रभावशाली साबित हो सकती है, बशर्ते इसका उपयोग कानूनी और नैतिक सीमाओं के भीतर किया जाए।