वॉशिंगटन/तेहरान/इस्लामाबाद:
ईरान-इज़रायल युद्ध की पृष्ठभूमि में जहां दुनिया युद्धविराम की उम्मीद कर रही है, वहीं अमेरिका के पूर्व और मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गतिविधियाँ फिर चर्चा में हैं। इस बार चर्चा का केंद्र है – पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर और ट्रंप के बीच अप्रत्यक्ष संवाद की संभावनाएं, जो उन्हें एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में दिखाना चाहता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अतीत में उत्तर कोरिया, अफगानिस्तान और मध्य-पूर्व में 'शांति' स्थापित करने की कोशिशों के नाम पर खुद को नोबेल पुरस्कार के योग्य घोषित करने की कई कोशिशें की थीं। अब जब इज़राइल-ईरान युद्ध गहराता जा रहा है, और पाकिस्तान इस तनावपूर्ण माहौल में निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में आ गया है, ट्रंप एक बार फिर रणनीतिक दांव चलने में लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और पाकिस्तान की गुप्त कूटनीति में ट्रंप की छाया स्पष्ट दिख रही है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल मुनीर, जो इस्लामी दुनिया में मजबूत छवि रखते हैं, ईरान और इज़राइल के बीच मध्यस्थता का प्रयास कर सकते हैं — और यहीं से ट्रंप की नोबेल की रणनीति को 'मूल्यवान मोहरा' मिल सकता है।
ट्रंप इस पूरे संघर्ष को अमेरिका की सैन्य ताकत दिखाने का अवसर भी बना रहे हैं। ईरान पर नज़र रखने के लिए अमेरिकी हाइपरसोनिक मिसाइलों की तैनाती की चर्चाएं तेज हैं। अगर ईरान पर हमला होता है, तो अमेरिका अपनी उच्चतम तकनीक वाले हथियारों के जरिए विश्व में सैन्य दबदबा फिर से स्थापित करना चाहेगा — और ट्रंप उस सफलता के राजनीतिक लाभ को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करेंगे।
पाकिस्तान की भूमिका को अमेरिका हमेशा से रणनीतिक रूप से देखता रहा है, लेकिन ट्रंप के दौर में यह रिश्ता और अधिक व्यक्तिगत बन गया था। अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी और तालिबान से समझौते में पाकिस्तान की भूमिका अहम रही थी। अब जब पश्चिम एशिया फिर से युद्ध की आग में घिरा है, तो ट्रंप के रणनीतिकारों की नज़र एक बार फिर इस्लामाबाद और रावलपिंडी की ओर है।
जहां एक ओर दुनिया को शांति की जरूरत है, वहीं ट्रंप जैसे राजनेताओं के लिए यह एक व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने का वक्त है। जनरल मुनीर जैसे सैन्य नेता यदि युद्धविराम या मध्यस्थता की कोई सफल पहल करते हैं, तो ट्रंप उसे अपना 'सियासी ताज' बनाने से नहीं चूकेंगे। इस पूरी कहानी में हथियार, रणनीति, शक्ति प्रदर्शन और एक नोबेल की लालसा — सभी कुछ छिपा है।