गाजा में जंग के बीच जिंदा रहने की जंग: भूख से लड़ते ‘फरिश्ते’ डॉक्टर और मरते मासूम

गाजा में जंग के बीच जिंदा रहने की जंग: भूख से लड़ते ‘फरिश्ते’ डॉक्टर और मरते मासूम

गाजा पट्टी – जहां हर सांस एक संघर्ष है, वहां अब जिंदगी बचाने वाले 'फरिश्ते' खुद जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। युद्ध की आग में झुलसते गाजा में इंसानी जीवन, खासतौर पर स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। अस्पताल खंडहरों में तब्दील हो रहे हैं, दवाएं खत्म हैं, खाना नहीं है – और इसी बीच डॉक्टर, जिन पर हजारों जानों को बचाने की जिम्मेदारी है, खुद भूख से बेहोश हो रहे हैं।

ना खून चढ़ाने को सिस्टम, ना पेट भरने को खाना

गाजा के दक्षिण में स्थित नासिर अस्पताल में डॉक्टर मोहम्मद साकर एक मिसाल बनकर उभरे हैं। इस हफ्ते, लगातार 24 घंटे की ड्यूटी के दौरान भूख के कारण वे अचानक बेहोश हो गए। लेकिन जैसे ही उन्हें जूस और आईवी से थोड़ी राहत मिली, उन्होंने दोबारा वापसी की – अपने मरीजों को मरता नहीं देख सकते थे।
डॉ. साकर ने बताया, "मुझे डायबिटीज नहीं है, लेकिन उस वक्त मैं कांप रहा था, चक्कर आ रहे थे। वो कमजोरी नहीं, वो भूख थी।"

गाजा के हर अस्पताल में यही हाल है – डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय… सबको एक समय का खाना मिलना भी ‘लग्जरी’ बन चुका है। अल-अहली अल-अरबी अस्पताल के निदेशक डॉ. फदेल नईम कहते हैं, “हमारी रसोई में कुछ नहीं बचा। दो लोग एक कटोरी चावल शेयर कर रहे हैं। कर्मचारियों को राशन की लाइन में लगना पड़ रहा है।”

कंकाल बनते बच्चे, टूटती मांओं की उम्मीद

नासिर अस्पताल का पीडियाट्रिक वार्ड मानो मरणासन्न मासूमों का अंतिम पड़ाव बन गया है। वहां के बच्चे इतने कमजोर हैं कि उन्हें देखकर इंसान और कंकाल में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
एक मां रोती हुई कहती है, “इस कमरे में चार बच्चे भूख से मर चुके हैं… मुझे डर है, मेरा बेटा पांचवां होगा।”

अस्पताल में बेबी फॉर्मूला खत्म हो चुका है, सप्लीमेंट्स ग़ायब हैं और मांएं खुद कुपोषण का शिकार हैं। जिन बच्चों को बचाने की उम्मीद थी, अब उनके लिए दवा नहीं, दूध नहीं और सुरक्षा नहीं।

900,000 भूखे बच्चे – इंसानियत का सबसे काला अध्याय

गाजा का हर बच्चा अब मौत की दहलीज पर है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 9 लाख बच्चे भूख से जूझ रहे हैं, जिनमें से 70,000 से अधिक पहले ही कुपोषित हो चुके हैं।
डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर कुपोषण दो हफ्तों में तीन गुना बढ़ गया है। इसका असर स्थायी है – मस्तिष्क का विकास रुक गया है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बर्बाद हो रही है।

न मदद पहुंच रही, न मददगार बोल रहे

संयुक्त राष्ट्र ने गाजा की पूरी आबादी को ‘पूर्ण खाद्य असुरक्षा’ की स्थिति में घोषित कर दिया है। लेकिन इजरायल सरकार ने भूख से मौत की बातों को सिरे से नकार दिया है।
गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन के ज़रिये मदद पहुंचाने के प्रयास भी विवादों में घिर गए हैं। अमेरिका और इजरायल की नीतियां सवालों के घेरे में हैं – क्या ये मदद है या सत्ता की सियासत?