सेनाओं के एकीकरण पर आर्मी चीफ का जोर

सेनाओं के एकीकरण पर आर्मी चीफ का जोर

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक बार फिर सेनाओं के एकीकरण और थिएटराइजेशन की खुलकर पैरवी की है। उन्होंने साफ कहा कि यह प्रक्रिया आज नहीं तो कल होकर रहेगी, फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें कितना समय लगेगा।


थिएटराइजेशन क्यों है जरूरी?

जनरल द्विवेदी ने कहा कि युद्ध केवल सेना अकेले नहीं लड़ती, बल्कि इसमें बीएसएफ, आईटीबीपी, साइबर एजेंसी, अंतरिक्ष एजेंसी, कॉग्निटिव वॉरफेयर एजेंसी जैसी कई संस्थाएं भी शामिल रहती हैं। इसके अलावा इसरो, रेलवे, नागरिक उड्डयन और केंद्र-राज्य की अन्य एजेंसियों की भी भूमिका होती है। ऐसे में इन सभी के बीच तालमेल और कमान की एकता के लिए एकीकृत थिएटर कमांड जरूरी है।


मतभेद भी मौजूद

  • वायुसेना का तर्क है कि संसाधनों को कई थिएटर कमांड्स में बांटने से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी।

  • नौसेना शुरू से इस विचार के पक्ष में है, क्योंकि उसे पूर्वी और पश्चिमी समुद्री सीमाओं की निगरानी के लिए मैरिटाइम थिएटर कमांड मिलने की संभावना है।

  • हाल ही में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थिएटर कमांड्स बनाने की जल्दबाजी से बचने की बात कही थी, जबकि नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने इसे अंतिम लक्ष्य बताया।

  • सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भी माना कि मतभेद हैं, लेकिन निर्णय राष्ट्रहित में ही लिया जाएगा।


थिएटराइजेशन की संभावित संरचना

केंद्र सरकार तीन बड़े थिएटर कमांड्स पर काम कर रही है:

  1. नॉर्दर्न थिएटर कमांड – चीन पर केंद्रित (मुख्यालय लखनऊ)

  2. वेस्टर्न थिएटर कमांड – पाकिस्तान पर केंद्रित (मुख्यालय जयपुर)

  3. मैरिटाइम थिएटर कमांड – समुद्री सीमाओं पर केंद्रित (मुख्यालय तिरुवनंतपुरम)

इनका मकसद है सेना, नौसेना और वायुसेना को बेहतर तालमेल के साथ एक-दूसरे की क्षमताओं का अधिकतम उपयोग करने देना।


विशेषज्ञों की राय

सैन्य जानकार मानते हैं कि भारत को अमेरिका या चीन की नकल नहीं करनी चाहिए। भारतीय परिदृश्य अलग है, इसलिए यहां का मॉडल देश की विशिष्ट जरूरतों और रणनीतिक सोच को ध्यान में रखकर बनना चाहिए।