सिडनी। वर्ष के अंत से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया के श्रम बाज़ार से बेहद सकारात्मक संकेत मिले हैं। दिसंबर महीने में देश में 65,000 नई नौकरियाँ सृजित हुईं, जिससे बेरोज़गारी दर घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई। नवंबर में यह दर 4.3 प्रतिशत थी।
इस अप्रत्याशित मज़बूती के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में तेज़ी देखी गई और यह अमेरिकी मुद्रा के मुक़ाबले 0.62 प्रतिशत बढ़कर 67.96 अमेरिकी सेंट पर पहुँच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार रोज़गार के ये आंकड़े आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को और मज़बूत कर रहे हैं।
बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की मौद्रिक नीतियों में बढ़ता अंतर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को और मज़बूती दे सकता है। जहां रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के इस वर्ष ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना है, वहीं यूएस फेडरल रिज़र्व द्वारा दरों में कटौती के संकेत दिए जा रहे हैं।
बॉन्ड बाज़ार मई तक 25 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी को पूरी तरह मूल्यांकित कर चुका है, जबकि 2026 के अंत तक कुल 48 आधार अंकों की वृद्धि की उम्मीद की जा रही है।
ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार दिसंबर में रोज़गार में आई वृद्धि का मुख्य कारण युवाओं की भागीदारी रही। 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग में अल्प-रोज़गार दर 2.1 प्रतिशत अंक घटकर 17.4 प्रतिशत पर आ गई।
कुल रोज़गार वृद्धि में पुरुषों का योगदान अधिक रहा। पुरुष रोज़गार 49,000 बढ़ा, जबकि महिला रोज़गार में 17,000 की वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही काम के कुल घंटे पहली बार 2 अरब घंटे के आंकड़े को पार कर गए।
हालांकि दिसंबर के आंकड़े उत्साहजनक रहे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 में कुल रोज़गार वृद्धि केवल 1.65 लाख रही, जो 2024 के 3.92 लाख की तुलना में काफ़ी कम है। महामारी को छोड़ दें तो यह 2016 के बाद सबसे कम वार्षिक रोज़गार वृद्धि मानी जा रही है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आगामी फरवरी बैठक में रिज़र्व बैंक रोज़गार के बजाय महंगाई के आंकड़ों को अधिक महत्व देगा। विशेष रूप से दिसंबर की ‘ट्रिम्ड मीन’ महंगाई दर यह तय करेगी कि ब्याज दरें बढ़ेंगी या नहीं।
गौरतलब है कि श्रम आंकड़े जारी होने से पहले बाज़ार को केवल 35,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी और बेरोज़गारी दर के स्थिर रहने का अनुमान लगाया जा रहा था। ऐसे में दिसंबर के नतीजों ने वित्तीय बाज़ारों और नीति-निर्माताओं दोनों को चौंका दिया है।