ऑस्ट्रेलिया में ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ को लेकर हंगामा

ऑस्ट्रेलिया में ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ को लेकर हंगामा

ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न बड़े शहरों में रविवार को होने वाले ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ को लेकर पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर है। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर हो रही आव्रजन नीतियों के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि “जनसंख्या वृद्धि और विदेशियों की बढ़ती मौजूदगी से समाज की एकजुटता कमजोर हो रही है।”


सरकार और विपक्ष की कड़ी आलोचना

पर्यावरण मंत्री सिनेटर मरे वॉट ने इन प्रदर्शनों की निंदा करते हुए कहा कि “ये रैलियाँ समाज में मेल-जोल बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि नफरत और विभाजन फैलाने के लिए आयोजित की जा रही हैं।”

वहीं विपक्ष के वरिष्ठ नेता सिनेटर जेम्स पैटरसन ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आयोजकों द्वारा ऑनलाइन साझा की गई सामग्री में भारतीय ऑस्ट्रेलियाई समुदाय को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इन प्रदर्शनों में नव-नाज़ी संगठनों के सदस्य शामिल होकर नए लोगों को भर्ती करने की कोशिश कर सकते हैं।


आयोजकों का दावा और विवाद

आयोजकों ने अपने पर्चों और वेबसाइट पर नारे दिए हैं—

  • “देश वापस लो”

  • “हमारी संस्कृति की रक्षा करो”

हालांकि आयोजकों ने यह साफ किया है कि उनका किसी श्वेत वर्चस्ववादी या नव-नाज़ी संगठन से संबंध नहीं है, लेकिन नेशनल सोशलिस्ट नेटवर्क के नेता थॉमस स्यूवेल ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि उनका संगठन इन प्रदर्शनों में “यूनिफॉर्म पहनकर और खुले तौर पर” भाग लेगा।


किन शहरों में होंगे प्रदर्शन

दोपहर 12 बजे से ये प्रदर्शन देशभर के प्रमुख शहरों और कुछ क्षेत्रीय इलाकों में होंगे:

  • मेलबर्न – फ्लिंडर्स स्ट्रीट स्टेशन

  • सिडनी – बेलमोर पार्क, हैमार्केट

  • ब्रिस्बेन – रोमा स्ट्रीट पार्कलैंड्स

  • एडिलेड – रंडल पार्क

  • कैनबरा – कैप्टन कुक मेमोरियल

  • पर्थ – सुप्रीम कोर्ट गार्डन्स

  • होबार्ट – सलामांका लॉन्स

  • डार्विन – सिविक सेंटर

इन्हीं जगहों पर काउंटर-प्रोटेस्ट (विरोध प्रदर्शन) भी आयोजित किए जाएंगे, जहाँ विभिन्न सामाजिक और छात्र संगठन बहुसांस्कृतिक मूल्यों के समर्थन में आवाज उठाएंगे।


क्या होगा असर?

अभी तक सोशल मीडिया इवेंट पेजों पर मेलबर्न और सिडनी की सभाओं के लिए करीब 1500 लोग ही पंजीकृत दिख रहे हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि संख्या चाहे जो भी हो, टकराव की संभावना को देखते हुए सुरक्षा कड़ी की गई है।

सरकार और विपक्ष दोनों का कहना है कि ऐसे प्रदर्शन देश की सामाजिक एकता और बहुसांस्कृतिक पहचान के लिए खतरा हैं। वहीं, आयोजकों का दावा है कि वे केवल “आव्रजन नीतियों की समीक्षा” चाहते हैं।