कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने देश की जैव विविधता को बचाने के लिए जंगली बिल्लियों के खिलाफ एक और बड़ा कदम उठाया है। ये बिल्लियाँ हर साल करीब 1.5 अरब देशी पक्षियों, स्तनधारियों, सरीसृपों और मेंढकों का शिकार कर देती हैं। अब जंगलों में ऐसे अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं जो लेज़र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से इन खतरनाक शिकारी बिल्लियों को पहचान कर खत्म कर रहे हैं।
इन उपकरणों को “फेलिक्सर” कहा जाता है। ये सेंसर, लेज़र और एआई कैमरे की मदद से किसी जानवर के आकार और आकृति की पहचान करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लक्ष्य बिल्ली ही है, न कि कंगारू, वॉम्बैट या इंसान। सही पहचान होने पर यह बिल्ली पर पौधों से प्राप्त एक विशेष विषैले जैल का छिड़काव करता है। बिल्लियाँ अपने शरीर को साफ करने की आदत में इस जैल को चाट लेती हैं और कुछ घंटों में उनकी मौत हो जाती है।
फेलिक्सर सिर्फ शिकार ही नहीं करते, बल्कि वन्यजीवों की संख्या और उनके आवागमन के आंकड़े भी जुटाते हैं। निर्माता कंपनी थायलैशन के महाप्रबंधक नाथन फ्रीमैन के अनुसार, देशभर में वर्तमान में करीब 400 डिवाइस सक्रिय हैं—उत्तर के गर्म इलाकों से लेकर दक्षिण के ठंडे और नम क्षेत्रों तक। पिछले तीन वर्षों में इनके जरिए “हजारों” जंगली बिल्लियों का सफाया किया गया है।
कम मेहनत, ज्यादा असर
प्रत्येक फेलिक्सर को पर्यावरण विभाग (DCCEEW) 1,000 डॉलर प्रतिमाह के किराये पर इस्तेमाल करता है। फ्रीमैन का कहना है कि ये उपकरण 24 घंटे लगातार काम करते हैं और मानव श्रम की आवश्यकता बेहद कम होती है, जिससे यह लागत-प्रभावी साबित हो रहा है।
बिल्लियों से 200 से अधिक प्रजातियों पर संकट
DCCEEW के अनुसार, जंगली बिल्लियाँ 200 से ज्यादा देशी प्रजातियों के लिए खतरा हैं और अब तक 20 प्रजातियों को विलुप्त कर चुकी हैं। इनके हमले से बचे जानवर भी अक्सर बिल्ली के लार में मौजूद घातक बैक्टीरिया से संक्रमित होकर मर जाते हैं।
फेलिक्सर प्रोजेक्ट ‘थ्रेटेंड स्पीशीज़ एक्शन प्लान’ का हिस्सा है, जिसके तहत देशी जीव-जंतुओं के संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्स्थापन पर काम हो रहा है।
पालतू बिल्लियों पर भी सख्ती
पालतू बिल्लियों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कई राज्यों में ‘कैट कंटेनमेंट’ और ‘कर्फ्यू’ कानून लागू हैं। ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी (ACT) ने 2022 में कानून पारित कर दिया, जिसके तहत 1 जुलाई 2022 के बाद जन्मी सभी बिल्लियों का घर से बाहर घूमना प्रतिबंधित है। विक्टोरिया राज्य के आधे से ज्यादा नगर परिषदों ने भी इसी तरह के कर्फ्यू लागू किए हैं।
सरकार और संरक्षणवादी संगठनों का मानना है कि यह तकनीक पूरी तरह समाधान नहीं है, लेकिन यह “एक अहम हथियार” है, जो जंगली बिल्लियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।