सुपरएन्यूएशन सुधार पर लेबर सरकार की नई पहल

10 लाख से अधिक कम आय वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट में मिलेगा लाभ

सुपरएन्यूएशन सुधार पर लेबर सरकार की नई पहल

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की Albanese सरकार ने सुपरएन्यूएशन (सेवानिवृत्ति बचत योजना) में सुधार को लेकर एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य कम आय वाले कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को बढ़ाना और अत्यधिक सुपर बैलेंस रखने वाले अमीर खाताधारकों पर अधिक कर लगाकर व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाना है।

इस संबंध में कोषाध्यक्ष Jim Chalmers ने बुधवार को संसद में Better Targeted Superannuation Concessions Bill पेश किया। यह विधेयक सरकार द्वारा पहले पेश किए गए सुपर सुधार प्रस्ताव के वापस लिए जाने के बाद नए सिरे से तैयार किया गया है।

बड़े सुपर खातों पर बढ़ेगा टैक्स बोझ

प्रस्तावित कानून के अनुसार, जिन लोगों के सुपरएन्यूएशन खाते में 30 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से 1 करोड़ डॉलर तक की राशि जमा है, उन पर टैक्स की दर बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दी जाएगी। वर्तमान में इस पर 15 प्रतिशत की समान कर दर लागू है।

वहीं जिन खातों में 1 करोड़ डॉलर से अधिक की राशि है, उन्हें 40 प्रतिशत टैक्स देना होगा। सरकार का कहना है कि इससे केवल 90,000 लोग, यानी कुल सुपर खाताधारकों का लगभग 0.3 प्रतिशत, ही प्रभावित होंगे।

कम आय वालों को मिलेगा सीधा फायदा

इस विधेयक का प्रमुख उद्देश्य कम आय वाले कर्मचारियों को राहत देना है। सरकार Low Income Superannuation Tax Offset (LISTO) की आय सीमा बढ़ाने जा रही है।

फिलहाल यह टैक्स ऑफसेट उन लोगों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय 37,000 डॉलर से कम है, ताकि उनकी सुपर बचत पर लगने वाला टैक्स वापस किया जा सके। नए प्रस्ताव के तहत इस सीमा को बढ़ाकर 45,000 डॉलर किया जाएगा, जो दूसरे टैक्स स्लैब के बराबर है।

सरकार के अनुसार इससे लगभग 13 लाख अतिरिक्त कर्मचारी इस योजना के दायरे में आएंगे और उनकी रिटायरमेंट बचत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

सरकार का तर्क: सुपर सिस्टम बनेगा निष्पक्ष

कोषाध्यक्ष जिम चाल्मर्स ने कहा कि यह सुधार सुपरएन्यूएशन व्यवस्था को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाएगा।

उन्होंने कहा,
“ये बदलाव कम आय वाले कर्मचारियों की बचत को बढ़ाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सुपर टैक्स रियायतों का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। हमारी कोशिश है कि कर्मचारी ज़्यादा कमाएँ, अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा अपने पास रख सकें और रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित जीवन जी सकें।”

पुराने प्रस्ताव पर क्यों हुआ था विरोध

गौरतलब है कि सरकार का पिछला सुपर सुधार प्रस्ताव पिछले साल वापस लेना पड़ा था। उस प्रस्ताव पर यह कहकर कड़ी आलोचना हुई थी कि सुपर बैलेंस की सीमा को महंगाई के अनुसार इंडेक्स नहीं किया गया था और अनरियलाइज़्ड गेंस यानी कागज़ी मुनाफ़े पर टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया था।

आलोचकों का कहना था कि इससे भविष्य में मध्यम वर्ग भी टैक्स के दायरे में आ सकता है। नए विधेयक में सरकार ने इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए हैं।

आगे क्या?

अब यह विधेयक संसद में बहस के लिए जाएगा, जहां विपक्ष और उद्योग जगत की प्रतिक्रिया अहम मानी जा रही है। यदि यह कानून बनता है, तो ऑस्ट्रेलिया की सुपरएन्यूएशन व्यवस्था में यह अब तक के सबसे बड़े सुधारों में से एक होगा।