प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ चीन यात्रा के दौरान ताइवान पर एक सीधे और कठिन सवाल का सामना करने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया की पुरानी नीति पर अडिग नजर आए। अमेरिका द्वारा क्षेत्र में चीन की आक्रामकता को लेकर अपने सहयोगियों से "स्पष्ट रुख" की मांग के बीच अल्बनीज़ ने शंघाई में स्पष्ट कहा कि ऑस्ट्रेलिया ताइवान को लेकर status quo यानी यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में है।
अमेरिकी प्रशासन, विशेष रूप से ट्रंप सरकार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को "तत्काल खतरा" मानते हुए अपने रणनीतिक साझेदारों से ताइवान संकट को लेकर अधिक प्रतिबद्धता की मांग कर रहा है। माना जा रहा है कि अगर चीन ने ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, खासकर अर्धचालक (सेमीकंडक्टर) उद्योग, पर भारी असर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने रविवार को शंघाई में पत्रकारों से बात करते हुए चीन के अधिकारियों की मौजूदगी में एक संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा,
“हम अपने सामरिक कौशल में निवेश कर रहे हैं और अपने रिश्तों को मजबूत कर रहे हैं, ताकि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनी रहे।”
उन्होंने आगे कहा,
“हम ताइवान के मामले में यथास्थिति का समर्थन करते हैं। हम वहां किसी भी एकतरफा कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं। हमारा रुख स्पष्ट है और हम लंबे समय से उस पर कायम हैं।”
अल्बनीज़ की यह टिप्पणी ट्रंप प्रशासन की ओर परोक्ष रूप से इशारा करती नजर आई, जब उन्होंने कहा:
“अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता, अनुशासन और स्पष्टता बेहद ज़रूरी है। ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र में शांति और सुरक्षा चाहता है।”
यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका ने AUKUS समझौते के तहत मिले परमाणु ऊर्जा संचालित पनडुब्बियों के उपयोग को लेकर ऑस्ट्रेलिया से किसी प्रकार की गारंटी मांगी है — विशेषकर ताइवान युद्ध की स्थिति में — अल्बनीज़ ने संयमित उत्तर दिया।
“AUKUS समझौते के अंतर्गत सभी पक्ष इस बात को भलीभांति समझते हैं कि यह सहयोग किस उद्देश्य से है।”
उन्होंने दोहराया कि ऑस्ट्रेलिया की नीति में कोई अस्थिरता नहीं है और यह “हर दिन बदलने वाली स्थिति नहीं है”।
प्रधानमंत्री की इस प्रेस वार्ता के दौरान चीन के ऑस्ट्रेलिया में राजदूत शियाओ क़ियान भी मौजूद थे और उनकी प्रतिक्रियाएं काफी गंभीर रहीं। माना जा रहा है कि अल्बनीज़ की छह दिवसीय चीन यात्रा की शुरुआत में यह बयान दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
पृष्ठभूमि:
ताइवान एक स्वशासित लोकतांत्रिक द्वीप है, जिसे चीन अपना हिस्सा मानता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश ताइवान के सुरक्षा मुद्दे को लेकर हालिया वर्षों में ज्यादा सतर्क हो गए हैं। AUKUS समझौता अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक सामरिक रक्षा साझेदारी है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया को उन्नत सैन्य तकनीक, विशेष रूप से परमाणु पनडुब्बियां, मिलेंगी।