ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता कर्ज: पूर्व प्रीमियर की चेतावनी

ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता कर्ज: पूर्व प्रीमियर की चेतावनी

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि देश का सार्वजनिक कर्ज तेजी से बढ़कर 1 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंचने वाला है। इस बीच, न्यू साउथ वेल्स के पूर्व प्रीमियर Mike Baird ने चेतावनी दी है कि ऑस्ट्रेलिया अब “कम कर्ज वाला देश” नहीं रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्षों से ऑस्ट्रेलिया अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति और कम कर्ज के लिए जाना जाता था, लेकिन मौजूदा रुझान इस स्थिति में बदलाव का संकेत दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

वहीं, संघीय कोषाध्यक्ष Jim Chalmers ने बजट बचत (स्पेंडिंग कट्स) को लेकर स्पष्ट प्रतिबद्धता देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विकास को प्रोत्साहित करने पर है, न कि जल्दबाजी में खर्च में कटौती करने पर।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते कर्ज का बोझ आने वाले वर्षों में ब्याज भुगतान को बढ़ा सकता है, जिससे सरकार के पास स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर खर्च करने के लिए कम संसाधन बचेंगे।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और बढ़ते सरकारी खर्च ने कर्ज के स्तर को तेजी से बढ़ाया है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह विकास को बनाए रखते हुए वित्तीय अनुशासन भी सुनिश्चित करे।

इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जहां विपक्ष सरकार पर वित्तीय प्रबंधन में ढिलाई बरतने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि कर्ज का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह आने वाली पीढ़ियों पर आर्थिक बोझ डाल सकता है।

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