ऑस्ट्रेलिया में घटती उत्पादकता पर बढ़ी चिंता, सरकार बुला रही तीन दिवसीय अहम बैठक

ऑस्ट्रेलिया में घटती उत्पादकता पर बढ़ी चिंता, सरकार बुला रही तीन दिवसीय अहम बैठक

ऑस्ट्रेलिया की शानदार जीवन-स्तर की कहानी में उत्पादकता (Productivity) एक अहम किरदार रही है। यही वजह है कि यह आर्थिक सिद्धांत देश को दशकों से उच्च वेतन, बेहतर सेवाएं और अधिक अवकाश समय देता आया है। लेकिन अब इसकी रफ्तार थमती दिख रही है, और यही वजह है कि यह मुद्दा राजनीति से लेकर अर्थशास्त्रियों तक की चर्चा का केंद्र बन गया है।

उत्पादकता है क्या?

सरल शब्दों में, उत्पादकता का मतलब है – कम मेहनत में ज्यादा उत्पादन
आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह माप है कि एक निश्चित संसाधन (जैसे श्रम और पूंजी) से कितना उत्पादन निकलता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर एक फास्ट-फूड आउटलेट 200 घंटे के कुल श्रम में 5000 बर्गर बनाता है, तो उसकी उत्पादकता 25 बर्गर प्रति घंटे होगी।

ऑस्ट्रेलिया में रफ्तार क्यों धीमी हो रही?

ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़े बताते हैं कि 2022-23 में औसत वार्षिक उत्पादकता वृद्धि दर 0.9% रही, जो 2003-04 में 1.8% थी। यह गिरावट सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में ही नहीं, बल्कि दुनिया के अधिकतर विकसित देशों में देखी जा रही है।

असर क्या होगा?

उत्पादकता घटने का सीधा असर जीवन-स्तर पर पड़ता है —

  • वेतन वृद्धि धीमी होती है

  • वस्तुएं और सेवाएं महंगी और सीमित हो सकती हैं

  • आर्थिक विकास की रफ्तार कम हो जाती है
    प्रोडक्टिविटी कमीशन के अनुमान के मुताबिक, अगर सुधार नहीं हुआ तो 2035 तक एक फुल-टाइम कर्मचारी सालाना करीब 14,000 डॉलर कम कमा पाएगा।

सरकार का अगला कदम – ‘प्रोडक्टिविटी राउंडटेबल’

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने 19 से 21 अगस्त तक कैनबरा में तीन दिवसीय बैठक बुलाई है। इसमें बिज़नेस और यूनियन प्रतिनिधि शामिल होंगे। मकसद है – ठहरती उत्पादकता को फिर से बढ़ाने के ठोस रास्ते खोजना।
खास बात यह है कि इसमें टैक्स सुधार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नियमों में ढील और यहां तक कि चार दिन के कार्यसप्ताह जैसे विचारों पर चर्चा हो सकती है।