सिडनी/कैनबरा, 1 अगस्त:
ऑस्ट्रेलिया के वित्त मंत्री (Treasurer) जिम चाल्मर्स द्वारा प्रस्तावित एक नए टैक्स सिस्टम — कैशफ्लो टैक्स — को लेकर देश के टॉप उद्योगपतियों और व्यापार संगठनों में गहरी चिंता फैल गई है। यह प्रस्ताव देश की 500 सबसे बड़ी कंपनियों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
जहां सरकार इसे "टैक्स प्रणाली में सुधार" का हिस्सा बता रही है, वहीं कारोबारी जगत इसे "आर्थिक विकास में बाधा और निवेश के लिए खतरा" मान रहा है।
परंपरागत रूप से कंपनियों से उनका नेट प्रॉफिट (शुद्ध लाभ) देखकर टैक्स वसूला जाता है, लेकिन कैशफ्लो टैक्स मॉडल में कंपनियों के आने-जाने वाले पैसे यानी नकदी प्रवाह (Cash Inflow - Outflow) पर टैक्स लगाया जाएगा।
इसका मतलब यह हुआ कि भले ही कंपनी को अस्थायी घाटा हो या मुनाफा अभी न दिख रहा हो, फिर भी अगर नकदी फ्लो ज़्यादा है, तो उस पर टैक्स लगेगा।
ऑस्ट्रेलिया की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों — माइनिंग, फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों — ने इस प्रस्ताव को "अनुचित और अस्थिरकारी" बताया है।
बिजनेस काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया (BCA) की प्रमुख ने कहा:
"यह टैक्स मॉडल कंपनियों को रिस्क लेने से रोकेगा। नई परियोजनाओं में निवेश घटेगा, जिससे नौकरियों पर असर पड़ेगा और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है।"
मुख्य रूप से टॉप 500 कंपनियां, जिनका टर्नओवर अरबों डॉलर में है
इसमें बैंक, खनन कंपनियां, सुपरमार्केट चेन, रियल एस्टेट समूह और अंतरराष्ट्रीय निवेशक शामिल हैं
कई कंपनियों को डर है कि इससे उनका विदेशी निवेश प्रभावित होगा और वे अपने मुख्यालय ऑस्ट्रेलिया से बाहर ले जा सकती हैं
जिम चाल्मर्स ने स्पष्ट किया है कि यह कोई अंतिम फैसला नहीं है।
उनका कहना है:
"हम टैक्स प्रणाली को आधुनिक, न्यायसंगत और आर्थिक रूप से कारगर बनाना चाहते हैं। हम कारोबारियों की राय का सम्मान करते हैं और सभी पक्षों से विचार-विमर्श करेंगे।"
विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर सरकार को आड़े हाथों लिया है।
ऑस्ट्रेलियाई लिबरल पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा:
"ये सरकार व्यापार विरोधी रवैया दिखा रही है। यह प्रस्ताव आर्थिक आत्मघात साबित हो सकता है।"
अब सवाल यह है कि क्या जिम चाल्मर्स इस प्रस्ताव को संशोधित करेंगे या विपक्ष और कॉरपोरेट दबाव के आगे झुकेंगे।