ऑस्ट्रेलिया की नामी यूनिवर्सिटी पर रिकॉर्ड-कीपिंग में गंभीर लापरवाही

कैज़ुअल शिक्षकों के वेतन उल्लंघन मामले में भारी जुर्माना

ऑस्ट्रेलिया की नामी यूनिवर्सिटी पर रिकॉर्ड-कीपिंग में गंभीर लापरवाही

ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था University of New South Wales (यूएनएसडब्ल्यू) पर श्रम कानूनों के उल्लंघन के गंभीर मामले में भारी आर्थिक दंड लगाया गया है। यह कार्रवाई फेयर वर्क ओम्बड्समैन द्वारा की गई लंबी जांच के बाद सामने आई है।

जांच में खुलासा हुआ कि यूनिवर्सिटी में रिकॉर्ड-कीपिंग की प्रणालीगत और व्यापक विफलताएं थीं, जिनके कारण कैज़ुअल अकादमिक कर्मचारियों को किए गए भुगतान की सही जांच संभव नहीं हो सकी। इन खामियों की वजह से यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया कि शिक्षकों को उनका पूरा और वैधानिक वेतन मिला या नहीं।

फेयर वर्क निरीक्षकों के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने कई वर्षों तक कर्मचारियों के कार्य घंटे, भुगतान दरें, ओवरटाइम और अन्य जरूरी रोजगार रिकॉर्ड सही ढंग से संधारित नहीं किए। यह ऑस्ट्रेलियाई फेयर वर्क कानूनों का सीधा उल्लंघन है, जिनके तहत नियोक्ताओं पर सटीक और पारदर्शी रिकॉर्ड बनाए रखना अनिवार्य है।

अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की अनुपलब्धता ने न केवल जांच प्रक्रिया को बाधित किया, बल्कि इससे सैकड़ों कैज़ुअल शिक्षकों के अधिकारों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। कैज़ुअल स्टाफ ने लंबे समय से आरोप लगाया है कि अपर्याप्त दस्तावेज़ों के कारण वे अपने वास्तविक कार्य के मुकाबले कम वेतन पाने को मजबूर रहे।

फेयर वर्क ओम्बड्समैन ने अपने बयान में कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान, जो समाज को कानून और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, उनसे श्रम कानूनों के पालन में उदाहरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है। इस तरह की लापरवाही को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्वीकार किया कि पुरानी प्रणालियों में गंभीर कमियां थीं। प्रशासन ने यह भी कहा कि नई डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग व्यवस्था लागू की जा रही है, आंतरिक ऑडिट को मजबूत किया गया है और कर्मचारियों को भविष्य में सही भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला ऑस्ट्रेलिया के पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक सख्त चेतावनी है। बढ़ती संख्या में कैज़ुअल कर्मचारियों पर निर्भर विश्वविद्यालयों को अब श्रम कानूनों के पालन में किसी भी तरह की ढिलाई से बचना होगा।

यह फैसला न केवल यूनिवर्सिटी प्रशासन की जवाबदेही तय करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट संदेश देता है कि कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।