ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों के वीसी बोले— बुलावा मिला तो रॉयल कमीशन के सामने पेश होंगे

ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों के वीसी बोले— बुलावा मिला तो रॉयल कमीशन के सामने पेश होंगे

कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (वाइस-चांसलर्स) ने कहा है कि यदि उन्हें आमंत्रित किया जाता है तो वे विश्वविद्यालय परिसरों में बढ़ते यहूदी-विरोध (एंटी-सेमिटिज़्म) के मुद्दे पर बनने वाले किसी भी रॉयल कमीशन के सामने पेश होने के लिए तैयार हैं। हाल ही में हुए एक आतंकी हमले के बाद यह सहमति बनी है कि शैक्षणिक संस्थानों को इस समस्या से निपटने के लिए “कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए”।

विश्वविद्यालय नेतृत्व का कहना है कि कैंपस में छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नफरत, भेदभाव या हिंसा के किसी भी रूप के लिए शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। कुलपतियों ने स्वीकार किया कि हाल की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा उपायों की समीक्षा और उन्हें और मजबूत करने की आवश्यकता है।

संयुक्त बयान में कहा गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाएगा कि परिसरों में सभी समुदायों के लिए सुरक्षित और समावेशी वातावरण बना रहे। इसमें जागरूकता कार्यक्रम, शिकायत निवारण तंत्र को सशक्त करना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय जैसे उपाय शामिल हैं।

सरकार की ओर से यदि रॉयल कमीशन का गठन किया जाता है, तो विश्वविद्यालय प्रमुखों ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करते हुए ही परिसरों में नफरत और कट्टरता के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ी जा सकती है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब ऑस्ट्रेलिया में विश्वविद्यालय परिसरों पर बढ़ते तनाव और घृणा-आधारित घटनाओं को लेकर सार्वजनिक चिंता बढ़ रही है। विश्वविद्यालयों ने दोहराया कि शिक्षा का उद्देश्य विभाजन नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और समझ को बढ़ावा देना है।