मंज़ूरी की देरी से निवेशकों का पैसा डूब रहा है: चाल्मर्स

मंज़ूरी की देरी से निवेशकों का पैसा डूब रहा है: चाल्मर्स

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के खजांची जिम चाल्मर्स ने चेतावनी दी है कि परियोजनाओं को मंज़ूरी मिलने में हो रही लंबी देरी के कारण लोग "कैश जला रहे हैं" यानी अपना पैसा बेवजह गंवा रहे हैं। उनका कहना है कि यह सुस्ती न केवल निवेशकों को हतोत्साहित करती है बल्कि देश की उत्पादकता को भी गहरी चोट पहुँचा रही है।

चाल्मर्स अगले हफ्ते कैनबरा में तीन दिनी आर्थिक गोलमेज सम्मेलन की मेज़बानी करेंगे, जहाँ उत्पादकता बढ़ाने और बजट को मज़बूत करने पर प्रमुख चर्चा होगी। उन्होंने द गार्जियन से बातचीत में कहा कि चाहे आवास निर्माण हो या नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ—हर जगह मंज़ूरी प्रक्रियाओं की देरी से लागत बढ़ रही है और विकास की गति थम रही है।


पर्यावरण कानूनों में सुधार का संकेत

चाल्मर्स ने संकेत दिया कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता कानून (EPBC Act) में सुधार सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। अल्बनीज़ सरकार अपनी पहली टर्म में इस जटिल कानून में सुधार का वादा पूरा नहीं कर पाई थी, लेकिन अब इसे लेकर सख़्त रुख अपनाने की तैयारी है।
खजांची ने कहा, “हमारी नियामक चुनौतियों और मंज़ूरी प्रक्रिया की देरी को सुधारना अब ज़रूरी हो गया है, वरना हम विकास की रफ़्तार खो देंगे।”


घटती जन्मदर और उत्पादकता का दबाव

एक अन्य बयान में चाल्मर्स ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की घटती जन्मदर भी चिंता का विषय है। वर्तमान में देश में जन्मदर प्रति महिला 1.5 है, जबकि स्थिर आबादी के लिए 2.1 आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “जब समाज बूढ़ा होता जा रहा है और हर सेवानिवृत्त व्यक्ति पर कम मज़दूर उपलब्ध होंगे, तब हमें अपने अर्थतंत्र को जितना हो सके मज़बूत और उत्पादक बनाना होगा। यही हमारी आने वाली चुनौतियों से निपटने का सबसे बड़ा हथियार है।”


निष्कर्ष

स्पष्ट है कि सरकार अब मंज़ूरी प्रक्रिया में तेजी, पर्यावरणीय कानूनों के सरलीकरण और उत्पादकता बढ़ाने के उपायों को साथ लेकर चलना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुधार समय पर लागू किए गए, तो इससे निवेश बढ़ेगा, रोज़गार के अवसर बनेंगे और धीमी होती अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।