अयोध्या: दुनिया में पहली बार राम मंदिर में हो रहा टाइटेनियम का उपयोग, हज़ार वर्षों तक बनी रहेगी संरचना की मजबूती

अयोध्या: दुनिया में पहली बार राम मंदिर में हो रहा टाइटेनियम का उपयोग, हज़ार वर्षों तक बनी रहेगी संरचना की मजबूती


अयोध्या में बन रहा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अब न केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आधुनिक तकनीक और सनातन परंपरा के अद्भुत संगम का उदाहरण भी बन गया है। यह विश्व का पहला मंदिर है, जिसकी संरचना में टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली टाइटेनियम धातु का उपयोग किया जा रहा है।



रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण में अब टाइटेनियम का ऐतिहासिक प्रयोग किया जा रहा है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि यह भारत ही नहीं, दुनिया का पहला मंदिर है जिसमें संरचना की मजबूती के लिए टाइटेनियम का इस्तेमाल हो रहा है।

मंदिर के भूतल, प्रथम व द्वितीय तल पर टाइटेनियम से निर्मित 32 जालियां लगाई जानी हैं। शनिवार को एक जाली को ट्रायल के तौर पर स्थापित किया गया, जिसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वीकृति दे दी है। बताया गया कि 15 अगस्त 2025 तक सभी जालियों का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

टाइटेनियम का महत्व
टाइटेनियम धातु अत्यंत मजबूत और टिकाऊ होती है, जिसकी उम्र 1000 वर्षों से भी अधिक मानी जाती है। इस परियोजना के लिए जालियों का निर्माण भारत सरकार की एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा किया जा रहा है।


मंदिर निर्माण प्रगति पर:
मिश्र ने जानकारी दी कि मंदिर के लोअर प्लिंथ पर 800 फीट की लंबाई में रामकथा को म्यूरल के रूप में उकेरा जा रहा है, जिसमें अब तक 500 फीट का कार्य पूरा हो चुका है। इसमें भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक की कथा चित्रित की जा रही है।